महिलाओं के सामने सीओ की अभद्र भाषा, पत्रकारों को थाने से भगाने का वीडियो वायरल
वीडियो में एक ओर जहां महिलाओं के सामने क्षेत्राधिकारी द्वारा खुलेआम गालियां देने का आरोप है, वहीं दूसरी ओर थाने के भीतर पत्रकारों को अपमानित कर भगाए जाने का मामला सामने आया है।
हरदोई से सुनील कुमार की रिपोर्ट —
हरदोई/जनमत न्यूज। उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद से सामने आए दो अलग-अलग वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्होंने पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सांडी क्षेत्र से जुड़े इन वीडियो में एक ओर जहां महिलाओं के सामने क्षेत्राधिकारी द्वारा खुलेआम गालियां देने का आरोप है, वहीं दूसरी ओर थाने के भीतर पत्रकारों को अपमानित कर भगाए जाने का मामला सामने आया है। इन घटनाओं ने ‘मिशन शक्ति’ और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ दोनों को कठघरे में ला खड़ा किया है।
वायरल पहले वीडियो में हरपालपुर क्षेत्र के सीओ सतेंद्र सिंह पर महिलाओं के सामने अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप है। वीडियो में सीओ की कथित भाषा और व्यवहार को लेकर आमजन में रोष देखा जा रहा है। महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान के बीच इस तरह की घटना को लोग उसकी भावना के विपरीत बता रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रहा व्यवहार न केवल वर्दी की मर्यादा पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि कानून के रक्षक की जिम्मेदारी और आचरण पर भी गंभीर बहस छेड़ता है।
दूसरा वीडियो हरदोई के सांडी थाना परिसर का बताया जा रहा है, जहां थाना प्रभारी पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने और उन्हें थाने से भगाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि कवरेज के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे क्षेत्र के पत्रकारों में गहरा आक्रोश है। पत्रकारों का कहना है कि जब पुलिस को अपनी उपलब्धियों का प्रचार करना होता है, तब मीडिया का सहारा लिया जाता है, लेकिन सवाल पूछने या सच्चाई सामने लाने पर यही मीडिया उनके लिए बोझ बन जाती है।
इन दोनों घटनाओं ने पुलिस की कथित ‘संवेदनशील पुलिसिंग’ के दावों की पोल खोल दी है। महिलाओं के सम्मान और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर उठे इन सवालों से आमजन में भी नाराजगी है। क्षेत्रीय लोगों और पत्रकारों का मानना है कि यदि पुलिस का व्यवहार इसी तरह असंवेदनशील और दोहरे मापदंडों वाला रहा, तो जनता का भरोसा कमजोर होना तय है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है। क्या दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा, यह देखना अभी बाकी है।

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