डिग्री नहीं, चरित्र आपकी सबसे बड़ी पहचान: सहारनपुर में शाकंभरी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल
उप्र के सहारनपुर में मां शाकंभरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल स्वास्थ्य कारणों से समारोह स्थल पर नहीं पहुंच सकीं।
सहारनपुर से अनिल वर्मा की रिपोर्ट
सहारनपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के सहारनपुर में मां शाकंभरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल स्वास्थ्य कारणों से समारोह स्थल पर नहीं पहुंच सकीं। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि "डिग्री आपकी पहचान नहीं, आपका चरित्र आपकी सबसे बड़ी पहचान है।"
उन्होंने विद्यार्थियों से डीजी लॉकर का अधिक से अधिक उपयोग करने, नशे से दूर रहने, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में डिग्री और अंकपत्र डीजी लॉकर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन बहुत कम विद्यार्थी उन्हें डाउनलोड करते हैं।
उन्होंने कुलपति और शिक्षकों से कहा कि सभी छात्रों को डीजी लॉकर का उपयोग करना सिखाया जाए, ताकि दुनिया के किसी भी कोने से वे अपनी डिग्री और प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल व्यवस्था का पूरा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी इस बार स्वर्ण पदक नहीं जीत सके, वे निराश न हों। प्रतियोगिता दूसरों से नहीं बल्कि स्वयं से होती है। ईमानदारी और मेहनत से सफलता निश्चित मिलती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं बल्कि प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को खत्म कर देता है।
युवाओं से योग, खेल, नवाचार, साहित्य और समाज सेवा की ओर बढ़ने की अपील की। राज्यपाल ने मां शाकंभरी देवी धाम के विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अब मंदिर क्षेत्र का स्वरूप काफी बदला है।
उन्होंने गुजरात के बनास डेयरी मॉडल का उदाहरण देते हुए विश्वविद्यालय को महिलाओं के माध्यम से गोबर और मिट्टी के बीज बॉल बनाकर पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ाने का अभियान शुरू करने की सलाह दी। उन्होंने प्रत्येक विद्यार्थी से मां के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाने और उसका संरक्षण करने का संकल्प लेने को कहा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना युवाओं के हाथों से ही पूरा होगा। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान न बनें, बल्कि शोध, नवाचार, कौशल विकास और रोजगार सृजन के केंद्र बनें। उन्होंने नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, एआई, एवीजीसी, अंतरिक्ष विज्ञान और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया।
22,315 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 99 को स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह में कुल 22,315 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 19,069 स्नातक और 3,246 परास्नातक विद्यार्थी शामिल रहे। स्नातक स्तर पर 6,770 छात्र और 12,299 छात्राएं, जबकि परास्नातक में 812 छात्र और 2,434 छात्राओं को उपाधि दी गई।
समारोह में कुल 99 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें 87 कुलपति स्वर्ण पदक, 6 कुलाधिपति स्वर्ण पदक तथा 6 प्रायोजित स्वर्ण पदक शामिल रहे। कुलपति स्वर्ण पदकों में 21 छात्र और 66 छात्राएं, कुलाधिपति स्वर्ण पदकों में 2 छात्र और 4 छात्राएं, जबकि प्रायोजित स्वर्ण पदकों में 1 छात्र और 5 छात्राएं सम्मानित हुईं।
छह विद्यार्थियों को मिला कुलाधिपति स्वर्ण पदक
विभिन्न संकायों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर अभिनेश कुमार (कृषि), श्रद्धा रौनी (कला), अमीषा गोयल (वाणिज्य), आंचल पुजारी (शिक्षा), खुशी (विधि) और रोहित गोयल (विज्ञान) को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले 87 मेधावियों को कुलपति स्वर्ण पदक तथा छह विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह में स्वर्ण पदक विजेताओं और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ अपनी उपलब्धि का जश्न मनाया।


