डरपोक जज कहलाना मंजूर नहीं, जरूरत पड़ी तो इस्तीफा दे दूंगा: मुजफ्फरनगर में बोले जस्टिस रवि कुमार
उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में हैं। शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए उन्होंने फैसले में अपनी न्यायिक सोच और सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में हैं। शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए उन्होंने फैसले में अपनी न्यायिक सोच और सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।
बताया जा रहा है कि पिछले पांच महीनों में जज रवि कुमार दिवाकर 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। इनमें दो ऐसे मामले भी हैं, जिनमें एक साथ चार-चार दोषियों को मृत्युदंड दिया गया।
अपने फैसले में उन्होंने लिखा- “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं। जब तक अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं, चलूंगा, वरना इस्तीफा दे दूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा।”
बताया जाता है कि उनके न्यायिक कार्यकाल में अब तक 36 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, इनमें से अभी तक किसी को फांसी नहीं हुई है और कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालत के फैसलों में बदलाव भी किया गया है।
कठोर फैसले, बेबाक टिप्पणियां और अपने सिद्धांतों पर कायम रहने का दावा- जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं।




