मुजफ्फरनगर: CMO की जांच में मरियम निजामुद्दीन हॉस्पिटल में मिलीं गंभीर अनियमितताएं, लाइसेंस निरस्त कर हॉस्पिटल सीज
उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
इसी क्रम में गोल चक्कर स्थित मरियम निजामुद्दीन हॉस्पिटल के खिलाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देशन में की गई जांच के बाद बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
अस्पताल में कथित रूप से अनियमित तरीके से ऑपरेशन कराए जाने की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अस्पताल का निरीक्षण एवं जांच की।
बताया गया कि जांच के दौरान अस्पताल में कई ऐसी अनियमितताएं सामने आईं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया। जांच टीम द्वारा अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सकीय व्यवस्थाओं, दस्तावेजों, पंजीकरण तथा चिकित्सकों से संबंधित अभिलेखों की जानकारी ली गई। जांच के दौरान अस्पताल में रजिस्टर्ड डॉक्टर के मौजूद नहीं मिलने की बात भी सामने आई।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उच्च अधिकारियों के स्तर से आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद विभाग ने मरियम निजामुद्दीन हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त करते हुए अस्पताल को सीज करने की कार्रवाई की। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद अस्पताल संचालकों में हड़कंप की स्थिति बन गई।
शिकायत के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
जानकारी के अनुसार अस्पताल में कथित अनियमित तरीके से ऑपरेशन कराए जाने की शिकायत स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देशन में टीम को जांच के लिए भेजा गया। टीम ने अस्पताल पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं और संबंधित दस्तावेजों की जांच की।
फर्जी और नियमविरुद्ध अस्पतालों के लिए बड़ी चेतावनी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के नेतृत्व में की गई यह कार्रवाई ऐसे अस्पताल संचालकों के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है, जो आवश्यक मानकों और नियमों का पालन किए बिना मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम यह संदेश देता है कि मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अस्पतालों में योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सकों की उपलब्धता, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, वैध पंजीकरण, निर्धारित मानकों का पालन और मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी अस्पताल में इन नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
अन्य अस्पतालों पर भी बढ़ सकती है निगरानी
मरियम निजामुद्दीन हॉस्पिटल पर हुई कार्रवाई के बाद अब जनपद के अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ने की संभावना है। खासकर ऐसे संस्थानों पर विभाग की नजर हो सकती है, जिनके संचालन, चिकित्सकों की उपलब्धता, पंजीकरण अथवा उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से उन मरीजों और उनके परिजनों को भी उम्मीद जगी है, जो निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान मानकों और व्यवस्थाओं को लेकर चिंतित रहते हैं। विभाग यदि इसी तरह शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करता है तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कार्रवाई के बाद आगे की जांच भी महत्वपूर्ण
अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर सीज किए जाने के बाद अब जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। अधिकारियों के मुताबिक आगे की कार्रवाई जांच में सामने आए तथ्यों और लागू नियमों के अनुसार की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद अब यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल में उपचार और ऑपरेशन से संबंधित गतिविधियों के संबंध में जांच के दौरान क्या-क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या पाई जाती है।
फिलहाल मरियम निजामुद्दीन हॉस्पिटल पर हुई कार्रवाई ने जनपद के स्वास्थ्य विभाग की सख्ती को साफ तौर पर सामने ला दिया है।
CMO डॉ. सुनील तेवतिया द्वारा की गई यह कार्रवाई नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पताल संचालकों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है कि मरीजों की सुरक्षा और निर्धारित स्वास्थ्य मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




