मुजफ्फरनगर: व्यापारियों के पक्ष में उतरे मंत्री कपिल देव, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल

उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में अवैध निर्माण,अग्नि सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय कमियों को लेकर चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के बीच प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल

मुजफ्फरनगर: व्यापारियों के पक्ष में उतरे मंत्री कपिल देव, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल
Published By- Diwaker Mishra

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट  

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में अवैध निर्माण,अग्नि सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय कमियों को लेकर चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के बीच प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल द्वारा अधिकारियों को नोटिस जारी करने के बाद ही प्रतिष्ठान सील करने की सलाह दिए जाने से नई बहस शुरू हो गई है।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा है कि बिना पूर्व सूचना या नोटिस के दुकानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई से व्यापारियों में भय और असंतोष का माहौल बन रहा है। उन्होंने प्रशासन को संवाद और सहयोग की नीति अपनाने की सलाह दी है।

हालांकि इस बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि प्रशासन किसी विशेष अभियान के तहत कानून और शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई कर रहा है, तो उस पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना क्या सरकारी तंत्र के कार्यों में हस्तक्षेप माना जा सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कार्रवाई का मूल्यांकन संबंधित कानूनों और न्यायिक निर्देशों के आधार पर होना चाहिए।

संवैधानिक व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकारियों को कानून लागू करने और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने का अधिकार प्राप्त है। वहीं जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना भी होता है। ऐसे में मंत्री के बयान को व्यापारी हितों की पैरवी और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन के रूप में भी देखा जा रहा है।

फिलहाल यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर चल रही कार्रवाई में प्रशासन की कठोरता अधिक है या फिर जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप। इस मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित नियमों, नोटिस प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई के तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।