उरई डीएम ने जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं से किया संवाद, परिजनों से भी लिया फीडबैक
उप्र के उरई के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय आज दोपहर जवाहर नवोदय विद्यालय पहुंचे तो माहौल कुछ अलग ही नजर आया। विद्यालय में छात्र-छात्राओं से मिलने पहुंचे उनके परिजन भी मौजूद थे।
उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट
उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के उरई के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय आज दोपहर जवाहर नवोदय विद्यालय पहुंचे तो माहौल कुछ अलग ही नजर आया। विद्यालय में छात्र-छात्राओं से मिलने पहुंचे उनके परिजन भी मौजूद थे।
जिलाधिकारी ने बच्चों और उनके परिजनों से सहजता से संवाद करते हुए विद्यालय की पढ़ाई, रहन-सहन और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली।
उन्होंने बच्चों से उनकी दिनचर्या और विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में सीधे बातचीत कर उनकी बात सुनी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय की रसोई पहुंचकर भोजन तैयार होने की व्यवस्था, साफ-सफाई और गुणवत्ता का जायजा लिया।
इसके बाद वे भोजनालय कक्ष में पहुंचे, जहां मुख्य विकास अधिकारी और प्रधानाचार्य के साथ बच्चों से भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। बच्चों से केवल पूछकर संतुष्ट होने के बजाय जिलाधिकारी ने भोजन की गुणवत्ता को स्वयं परखने का निर्णय लिया और मुख्य विकास अधिकारी व प्रधानाचार्य के साथ बच्चों के बीच टेबल पर बैठकर भोजन किया।
जिलाधिकारी को अपने साथ बैठकर भोजन करते देख छात्र-छात्राओं के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। बच्चों के साथ सहज माहौल में बातचीत करते हुए जिलाधिकारी ने उनके अनुभव जाने और भोजन के स्वाद व गुणवत्ता के बारे में भी जानकारी ली।
इस दौरान उन्होंने विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि बच्चों को स्वच्छ, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए और उनकी सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी न रहने पाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चे हमारे भविष्य की नींव हैं, इसलिए उनकी शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित एवं सुखद वातावरण का भी विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है।
उन्होंने विद्यालय प्रशासन को बच्चों की आवश्यकताओं और सुझावों को प्राथमिकता के साथ सुनने तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी का बच्चों के बीच पहुंचकर उनसे संवाद करना, परिजनों से फीडबैक लेना और फिर उन्हीं के साथ बैठकर भोजन करना निरीक्षण को महज औपचारिकता से अलग बनाता नजर आया। इससे छात्र-छात्राओं में भी आत्मीयता और उत्साह का भाव देखने को मिला।







