दिल्ली हॉस्टल हादसे में दिबियापुर के पवन की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल गिरने से छह छात्रों की मौत की खबर ने उप्र के औरैया जनपद के दिबियापुर कस्बे के कैलाश बाग, बाबू दयारामनगर निवासी एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
औरैया से अरुण वाजपेयी की रिपोर्ट
औरैया/जनमत न्यूज़। दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल गिरने से छह छात्रों की मौत की खबर ने उप्र के औरैया जनपद के दिबियापुर कस्बे के कैलाश बाग, बाबू दयारामनगर निवासी एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
हादसे में जान गंवाने वालों में दिबियापुर के रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह का इकलौता बेटा पवन कुमार भी शामिल था। भविष्य संवारने दिल्ली गया पवन महज दो महीने बाद ही परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गया।
पवन कुमार ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज दिबियापुर से इंटर की परीक्षा पास की थी। बीते 20 जुलाई को ही उसका दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में प्रवेश हुआ था। पढ़ाई पूरी कर बेहतर भविष्य बनाने के सपने लेकर वह दिल्ली गया था, लेकिन किसे पता था कि उसके सपनों का सफर इतनी जल्दी थम जाएगा।
हॉस्टल गिरने की सूचना मिलने के बाद परिवार में बेचैनी फैल गई। पिता विशंभर सिंह बेटे की चिंता में परेशान हो उठे। दिल्ली में रह रही उनकी बेटी ने हॉस्टल पहुंचकर स्थिति देखी, तब परिवार को पवन के नहीं रहने की सूचना मिली। यह खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। इसके बाद सोमवार सुबह पिता अपनी बेटी के साथ दिल्ली रवाना हो गए।
पवन चार बहनों के बीच इकलौता भाई था। बहनों के लिए वह केवल भाई नहीं, बल्कि परिवार का सहारा और खुशियों का केंद्र था। उसकी एक बहन प्रियांशी का पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश हुआ था और वह गर्ल्स हॉस्टल में रहती है। इसी कारण परिवार का दिल्ली से भी जुड़ाव था।
पवन की मां मीरा देवी मानसिक रूप से बीमार हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी हालत बिगड़ने की आशंका के चलते उन्हें अभी तक इस दुखद घटना की जानकारी नहीं दी गई है।
परिवार के रिश्तेदारों का घर पर पहुंचना शुरू हो गया है। मोहल्ले के लोग भी इस हादसे से हतप्रभ हैं। जिस घर में बेटे के भविष्य को लेकर उम्मीदें थीं, वहां अब मातम पसरा है।




