भदोही में फर्जी बीएसए राम सिंह यादव गिरफ्तार, अंक बढ़ाने वाला खुद हो गया फेल
उप्र के भदोही जिले की ज्ञानपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर ठग को पकड़ लिया है। नाम है राम सिंह यादव। पिता का नाम शिवकरण यादव। रहता है प्रयागराज कमिश्नरेट के थाना सरायममरेज के गांव बन्दीपट्टी खुद को शिक्षा विभाग का बीएसए बताकर लोगों को ठगता था।
भदोही से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
भदोही/जनमत न्यूज़। उप्र के भदोही जिले की ज्ञानपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर ठग को पकड़ लिया है। नाम है राम सिंह यादव। पिता का नाम शिवकरण यादव। रहता है प्रयागराज कमिश्नरेट के थाना सरायममरेज के गांव बन्दीपट्टी खुद को शिक्षा विभाग का बीएसए बताकर लोगों को ठगता था।
फर्जी नियुक्ति लेटर, जॉइनिंग लेटर दिखाता था। बच्चों के अंक बढ़ाने का झांसा देता था। और इस झांसे में फंसाकर बैंक मित्र और ग्राहक सेवा केंद्र चलाने वालों से पैसे निकलवा लेता था।
पुलिस की जांच में पता चला कि इसके खिलाफ 40 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं। करीब 40 से 50 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हो चुका है। भदोही में तीन मुकदमे और प्रदेश के दूसरे जिलों में तीन मुकदमे पहले से चल रहे थे। यानी कुल छह केस।
ज्ञानपुर में तो इसने कमाल का काम किया। खुद को बीएसए मनोज कुमार सिंह बता दिया। फर्जी आधार कार्ड भी निकाल लिया। फिर दुकान पर पहुंचा और बोला – भाई गाड़ी खराब हो गई है, थोड़ा पैसा ट्रांसफर करा दो। दुकान वाले ने स्कैनर लगाया और 36,800 रुपये निकल गए। गाड़ी तो खराब हुई होगी, लेकिन जेब खाली करने का तरीका बहुत स्मार्ट था!
मुखबिर की खबर मिलते ही पुलिस टीम दुर्गागंज तिराहा गोपीगंज मोड़ पर पहुंच गई। वहां घेराबंदी करके राम सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
असली बीएसए स्कूलों में घूम-घूमकर काम देखते हैं, और यह नकली बीएसए दुकानों में घूम-घूमकर स्कैनर चला रहा था। अंक बढ़ाने वाला आदमी अब खुद जेल के अंदर अंक बढ़ाने वाला बन गया है। फर्जी आधार दिखाकर ठगी करने वाले को असली हथकड़ी जरूर अच्छी लगी होगी।
लोगों को झांसा देने वाला खुद झांसे में आ गया। शिक्षा विभाग में घुसने का सपना देखा था, लेकिन सपना अधूरा छोड़कर जेल का टिकट कट गया। अब जेल में बैठकर सोच रहा होगा – काश असली बीएसए बन जाता, तो इतनी जल्दी पकड़ा नहीं जाता!
पुलिस कह रही है कि और भी शिकायतें निकल सकती हैं। यानी ठगी का अध्याय अभी बंद नहीं हुआ है। सबको चेतावनी – अगर कोई बीएसए बनकर आए और गाड़ी खराब होने का रोना रोए, तो पहले उसका आधार चेक करो, फिर पुलिस थाने का नंबर डायल करो। वरना स्कैनर तुम्हारा रहेगा, लेकिन पैसे ठग के खाते में चले जाएंगे




