हाथरस जंक्शन पर रेलवे की कार्रवाई पर उठे सवाल, कैंटीन संचालकों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर अवैध वेंडर खुलेआम ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर सामान बेचते दिखाई देते हैं, लेकिन उनके खिलाफ शायद ही कभी कोई ठोस कार्रवाई होती है।

हाथरस जंक्शन पर रेलवे की कार्रवाई पर उठे सवाल, कैंटीन संचालकों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

हाथरस से होमेन्द्र कुमार मिश्रा की रिपोर्ट —

हाथरस/जनमत न्यूज: हाथरस जंक्शन पर रेलवे प्रशासन की हालिया कार्रवाई के बाद कैंटीन संचालकों और वेंडरों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कैंटीन संचालकों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन राजस्व तो हर स्टेशन की कैंटीन और पार्किंग से प्राप्त करता है, लेकिन सुविधाएं पूरी तरह मुहैया नहीं कराता। इसके बावजूद संचालकों और वेंडरों से सभी मानकों को सख्ती से पूरा करने की अपेक्षा की जाती है।

जानकारी के अनुसार रेलवे को माल धुलाई के साथ-साथ स्टेशन परिसर में संचालित कैंटीन और पार्किंग से भी अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद कैंटीन संचालकों का कहना है कि रेलवे प्रशासन कई बार छोटी-छोटी कमियों को आधार बनाकर उनके वेंडरों पर कार्रवाई करता है। कभी रेलवे उत्पादों के विपरीत सामान बेचने का आरोप लगाया जाता है तो कभी वैध वेंडरों को अवैध घोषित कर चालान कर दिया जाता है।

कैंटीन संचालकों का कहना है कि कई बार वेंडर सभी मानकों को पूरा करते हैं, लेकिन किसी छोटी कमी को आधार बनाकर रेलवे की जांच टीम उन्हें अवैध घोषित कर देती है और चालान कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में चालान का आर्थिक बोझ अक्सर गरीब वेंडर नहीं उठा पाते, जिसके चलते यह जिम्मेदारी कैंटीन संचालकों के सिर पर आ जाती है, जबकि संबंधित वेंडर पहले से ही वैध रूप से उनके साथ काम कर रहा होता है।

संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर अवैध वेंडर खुलेआम ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर सामान बेचते दिखाई देते हैं, लेकिन उनके खिलाफ शायद ही कभी कोई ठोस कार्रवाई होती है। उनका कहना है कि यह अवैध वेंडर किसकी सरपरस्ती में काम करते हैं और क्यों जिम्मेदार अधिकारियों की जांच में नहीं पकड़े जाते, यह भी एक बड़ा सवाल है।

आरोप है कि रेलवे की अधिकांश चेकिंग दिन के समय ही की जाती है, जबकि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर बड़ी संख्या में अवैध वेंडर सक्रिय रहते हैं। इसी दौरान कई बार यात्रियों से पानी से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं तक के लिए अधिक कीमत वसूली जाती है। इसके बावजूद इस समयावधि में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शायद ही कभी जांच की जाती है।

कैंटीन संचालकों का कहना है कि हाथरस जंक्शन पर हाल ही में हुई कार्रवाई भी इसी प्रकार की है, जिसमें वेंडरों के अधिकांश मानक पूरे होने के बावजूद केवल नया आई कार्ड न होने के कारण उन्हें अवैध वेंडर मानते हुए चालान की श्रेणी में डाल दिया गया। संचालकों का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल जांच का लक्ष्य पूरा करने के लिए की गई, जिससे कैंटीन संचालकों और वेंडरों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर कैंटीन संचालकों और रेलवे प्रशासन के बीच नाराजगी का माहौल बना हुआ है। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और भविष्य में इस तरह की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।