पीलीभीत: बदहाल रास्ते ने खोली विकास के दावों की पोल, कीचड़ भरी पगडंडी से शव लेकर गुजरने को ग्रामीण मजबूर

विकास के दावों के बीच उप्र के बहराइच जनपद के अमरिया विकासखंड की ग्राम पंचायत भौना के मजरा हुसैन नगर से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

पीलीभीत: बदहाल रास्ते ने खोली विकास के दावों की पोल, कीचड़ भरी पगडंडी से शव लेकर गुजरने को ग्रामीण मजबूर
Published By- Diwaker Mishra

पीलीभीत से प्रेम पाठक की रिपोर्ट

पीलीभीत/जनमत न्यूज़। विकास के दावों के बीच उप्र के पीलीभीत जनपद के अमरिया विकासखंड की ग्राम पंचायत भौना के मजरा हुसैन नगर से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। गांव में किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी अंतिम यात्रा के लिए भी ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं है। 

बरसात के दिनों में खेतों के बीच से गुजरने वाली कच्ची पगडंडी कीचड़ और फिसलन से भर जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को शव कंधे पर रखकर बेहद मुश्किल रास्ते से अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचना पड़ता है।

गांव निवासी पीतम राम (40) पुत्र राम दयाल की 29 अगस्त को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बताया गया कि वह जहानाबाद बाजार गए थे और वापस लौटते समय हादसे का शिकार हो गए। 31 अगस्त को जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो गांव की बदहाल सड़क व्यवस्था एक बार फिर उजागर हो गई।

शव को कंधा देने वाले ग्रामीणों को खेतों के बीच बनी कीचड़ भरी पगडंडी से होकर गुजरना पड़ा। बारिश के कारण रास्ते पर फिसलन होने से कदम-कदम पर हादसे का खतरा बना रहा। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार शव यात्रा के दौरान लोग कीचड़ में फिसलकर गिर भी चुके हैं।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में ग्रामीण खेतों के बीच से शव लेकर जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद गांव की सड़क व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पक्के मार्ग की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा की गरिमा से भी जुड़ी बुनियादी जरूरत है।

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से जल्द पक्का मार्ग बनवाने की मांग की है। उनका कहना है कि कम से कम किसी की अंतिम यात्रा ऐसी न हो, जिसमें शव को कंधा देने वालों को खेतों की कीचड़ भरी पगडंडी पर कदम-कदम संभलकर चलना पड़े।