मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की मिसाल, मुस्लिम कारीगर तैयार करते हैं ठाकुर जी की पोशाक
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आते ही देश-दुनिया के कृष्ण मंदिरों में तैयारियां तेज हो जाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को इस दिन विशेष पोशाक धारण कराई जाती है
मथुरा से सैयद जाहिद की रिपोर्ट
मथुरा/जनमत न्यूज़। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आते ही देश-दुनिया के कृष्ण मंदिरों में तैयारियां तेज हो जाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को इस दिन विशेष पोशाक धारण कराई जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कान्हा की जन्मस्थली मथुरा वृंदावन में इन पोशाकों को तैयार करने का काम सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की भी खूबसूरत मिसाल है।
यहां भगवान कृष्ण की पोशाक तैयार करने वाले ज्यादातर कारीगर हिदुओं के साथ-साथ मुस्लिम भी हैं, जो पूरी श्रद्धा और बारीकी से ठाकुर जी की पोशाक तैयार करते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हो और कान्हा की पोशाकों की चर्चा न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। मथुरा में जन्माष्टमी से पहले भगवान श्रीकृष्ण की रंग-बिरंगी पोशाकों को तैयार करने का काम इन दिनों जोर-शोर से चल रहा है।
देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक यहां की बनी कृष्ण पोशाकों की खास पहचान है। जैसे-जैसे जन्माष्टमी नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे इन पोशाकों की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। खास बात ये है कि इन पोशाकों को तैयार करने में मुस्लिम कारीगर जुड़े हुए हैं। महीन कारीगरी, मोतियों, स्टोन और आकर्षक डिजाइन से तैयार की जा रही इन पोशाकों में इस बार ठाकुर जी की अलग ही छटा देखने को मिलेगी।
कारीगर लगातार नई-नई डिजाइनों पर काम कर रहे हैं। कोई पोशाक सादगी भरी है तो किसी में मोतियों और स्टोन का शानदार काम किया गया है। इन पोशाकों की कीमत 10 रुपये से शुरू होकर लाखों रुपये तक पहुंचती है। जन्माष्टमी के मौके पर बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कई कारीगरों को 14 से 16 घंटे तक काम करना पड़ रहा है।
भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पोशाक तैयार करते समय ये मुस्लिम कारीगर साफ-सफाई और शुद्धता का भी विशेष ध्यान रखते हैं। उनके हाथों से तैयार होकर जब ये पोशाकें ठाकुर जी तक पहुंचती हैं, तो ये सिर्फ कपड़े और सजावट का सामान नहीं रहतीं, बल्कि उस परंपरा की तस्वीर बन जाती हैं, जहां आस्था और भाईचारा साथ-साथ दिखाई देता है।
मथुरा वृंदावन की गलियों में तैयार होने वाली ये पोशाकें भगवान कृष्ण के श्रृंगार को तो खास बनाती ही हैं, साथ ही हिंदू-मुस्लिम एकता और सद्भाव का संदेश भी देती हैं। जन्माष्टमी पर जब ठाकुर जी इन पोशाकों में सजते हैं, तो इनके पीछे उन कारीगरों की मेहनत भी दिखाई देती है, जो धर्म से ऊपर उठकर अपनी कला को भगवान की सेवा मानकर करते हैं।




