राष्ट्रपति के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन: सवर्ण आर्मी ने उठाए सवाल, अब दिल्ली तक जाएगी मिर्जापुर की आवाज

उप्र के मिर्जापुर जिले में सवर्ण आर्मी के पदाधिकारियों ने सामान्य वर्ग से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रपति के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन: सवर्ण आर्मी ने उठाए सवाल, अब दिल्ली तक जाएगी मिर्जापुर की आवाज
Published By- Diwaker Mishra

मिर्जापुर से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट

मिर्जापुर/जनमत न्यूज़। उप्र के मिर्जापुर जिले में सवर्ण आर्मी के पदाधिकारियों ने सामान्य वर्ग से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। संगठन के प्रदेश सचिव मुकेश पाण्डेय के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था से लेकर SC/ST एक्ट, सवर्ण आयोग के गठन और UGC से जुड़े कुछ प्रावधानों की समीक्षा की मांग की गई।

ज्ञापन में संगठन ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सामान्य वर्ग की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसलिए सरकार को समानता के सिद्धांत के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

पहली मांग में आरक्षण को जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर लागू करने की बात कही गई, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।

दूसरी मांग SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर रखी गई। संगठन का कहना है कि कानून का उद्देश्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा है, लेकिन यदि कहीं इसका दुरुपयोग होता है तो निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

तीसरी मांग में सामान्य वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक समस्याओं के अध्ययन एवं समाधान के लिए अलग सवर्ण आयोग के गठन की मांग की गई। वहीं चौथी मांग UGC से जुड़े उन प्रावधानों की समीक्षा या वापसी को लेकर है, जिन्हें संगठन भेदभावपूर्ण मानता है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगें किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि समान अवसर और न्याय की भावना से जुड़ी हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की।

भारतीय लोकतंत्र में ज्ञापनों का भी अपना अलग मौसम होता है। कभी सड़कें ज्ञापन से भर जाती हैं तो कभी फाइलें। मिर्जापुर से निकला यह चार सूत्रीय कागज अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की उम्मीद लिए रवाना हुआ है। सवाल यह है कि यह ज्ञापन सरकारी फाइलों में "विचाराधीन" की शरण पाएगा या किसी बैठक के एजेंडे तक पहुंच सकेगा।

फिलहाल इतना तय है कि मिर्जापुर से उठी आवाज ने फिर याद दिलाया है कि लोकतंत्र में हर वर्ग अपनी बात राजधानी तक पहुंचाने का रास्ता तलाशता रहता हैअब देखना यह है कि इस आवाज की गूंज नोटशीट पर सुनाई देती है या सिर्फ ज्ञापन की मोहर तक सीमित रह जाती है।