चेन्नई के डी.जी. वैष्णव कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘दर्पण 2026–27’ का भव्य आयोजन, सात सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं ने बांधा समां
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के द्वारकादास गोवर्धनदास वैष्णव कॉलेज के हिंदी विभाग, शिफ्ट-II द्वारा आयोजित अन्तर्महाविद्यालयीन सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘दर्पण 2026–27’ का भव्य आयोजन किया गया।
स्पेशल रिपोर्ट अभिलाष भट्ट
चेन्नई/जनमत न्यूज़। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के द्वारकादास गोवर्धनदास वैष्णव कॉलेज के हिंदी विभाग, शिफ्ट-II द्वारा आयोजित अन्तर्महाविद्यालयीन सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘दर्पण 2026–27’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों से आए लगभग 200 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया, जबकि 500 से अधिक विद्यार्थियों ने सभागार में उपस्थित रहकर कार्यक्रम का आनंद लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रार्थना एवं कीर्तना, नारायणी की प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. निर्मला एस. मौर्य, पूर्व कुलपति, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उत्तर प्रदेश रहीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. मंजू रुस्तगी, कवयित्री एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, वल्लियम्माल कॉलेज फॉर वुमेन, चेन्नई तथा श्रीमती रेखा राय, कवयित्री, साहित्यकार एवं समाजसेविका, चेन्नई उपस्थित रहीं।
हिंदी विभाग, शिफ्ट-II के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी ने अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय का स्वागत करते हुए ‘दर्पण’ की रूपरेखा, उद्देश्य एवं इसकी सांस्कृतिक यात्रा से विद्यार्थियों को अवगत कराया। हिंदी विभाग, शिफ्ट-I के विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार सिंह ने भी ‘दर्पण’ सांस्कृतिक कार्यक्रम की सराहना करते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. निर्मला एस. मौर्य ने अपने प्रेरक संबोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपने जीवन की यात्रा—एक लेक्चरर से विश्वविद्यालय की कुलपति तक—के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए और विद्यार्थियों को निरंतर परिश्रम, आत्मविश्वास एवं लक्ष्य के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मंजू रुस्तगी एवं श्रीमती रेखा राय ने अपने प्रेरणादायी विचारों तथा काव्य-पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उनकी प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों का मन मोह लिया।
सात सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं ने बांधा समां
‘दर्पण 2026–27’ के अंतर्गत कुल सात सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें ‘मन के अल्फाज़’, ‘इशारों-इशारों में’, ‘सुरों की महफिल’, ‘मंच की मस्ती’, ‘शब्दों का सफर’, ‘रंगों की कहानी’ एवं ‘पारंपरिक नृत्य’ प्रमुख रहे। विभिन्न महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने इन प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिताओं के समापन पर ‘दर्पण 2026–27’ की विजेता इथिराज कॉलेज फॉर वुमेन, चेन्नई रही, जबकि एम.ओ.पी. वैष्णव कॉलेज फॉर वुमेन, चेन्नई उपविजेता रही।
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के शोध-पत्रों का पुस्तकाकार प्रकाशन
कार्यक्रम के समापन सत्र में हिंदी विभाग, शिफ्ट-II द्वारा फरवरी 2026 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य और पुष्टिमार्ग : एक मानवीय दृष्टि’ के दौरान देश-विदेश से आए विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों द्वारा प्रस्तुत शोध-पत्रों के संकलन को पुस्तकाकार रूप प्रदान किया गया। इस पुस्तक का लोकार्पण/विमोचन समापन सत्र में मुख्य अतिथि, महाविद्यालय के प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
इस पुस्तक के संकलन एवं प्रकाशन को मूर्त रूप देने में डॉ. सरोज सिंह ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर अथक परिश्रम किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की व्यस्त तैयारियों के साथ-साथ पुस्तक के कार्य को भी उन्होंने पूरी लगन एवं समर्पण के साथ पूरा किया।
समापन सत्र एवं शुभकामनाएँ
कार्यक्रम के समापन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य कैप्टन डॉ. एस. संतोष बाबू ने अध्यक्षीय संबोधन दिया। उन्होंने हिंदी, संस्कृत और तमिल भाषाओं के पारस्परिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषाएँ लोगों को जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने ‘दर्पण’ जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के लिए हिंदी विभाग को बधाई दी तथा विद्यार्थियों को अपनी भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
‘दर्पण’ के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय के सचिव डॉ. अशोक कुमार मूँधड़ा एवं कोषाध्यक्ष श्री अशोक केडिया ने भी अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए हिंदी विभाग के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
समापन सत्र का संचालन डॉ. कुमार अभिषेक ने किया, जबकि संपूर्ण कार्यक्रम का प्रभावी संचालन विद्यार्थियों विवेक एवं ओजस्विनी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी विभाग के समस्त प्राध्यापकों—डॉ. सुनील पाटिल, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. कुमार अभिषेक, डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र, डॉ. हर्षलता सहित विभाग के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम की सफलता में विद्यार्थियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। हर्षिता, यश, विवेक, आर्यन, अच्युत,शिवम सहित अनेक विद्यार्थियों ने दिन-रात मेहनत कर कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के सामूहिक प्रयास, तकनीकी टीम एवं स्वयंसेवकों के सहयोग से ‘दर्पण 2026–27’ एक सफल एवं यादगार सांस्कृतिक आयोजन बन सका।
अंत में डॉ. सुनील पाटिल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, प्राचार्य, महाविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, तकनीकी टीम एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ ‘दर्पण 2026–27’ का गरिमापूर्ण समापन हुआ।



