ब्रिटेन में स्कूल वालों ने तिलक लगाने से किया मना, हिंदू पिता ने कर दिया मुकदमा
ब्रिटेन में नौ साल के एक ब्रिटिश-भारतीय हिंदू लड़के के पिता ने अपने बेटे के पूर्व प्राइमरी स्कूल के खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
लंदन/जनमत न्यूज़। ब्रिटेन में नौ साल के एक ब्रिटिश-भारतीय हिंदू लड़के के पिता ने अपने बेटे के पूर्व प्राइमरी स्कूल के खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
पिता का आरोप है कि स्कूल ने उनके बेटे को तिलक-चांदलो (जो उनके हिंदू स्वामीनारायण धर्म का प्रतीक है) लगाने की अनुमति नहीं दी, जो कि एक तरह का गैर-कानूनी धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न है।
पिता को यूके के हिंदू नेटवर्क एक्शन फॉर हार्मनी से आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने अपने बेटे के कानूनी प्रतिनिधि के तौर पर एलिंग बरो के सरकारी स्कूल विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल (एल्परटन) से 25,000 पाउंड के मुआवजे की मांग की है।
पिता ने स्कूल पर क्या आरोप लगाया?
उनका आरोप है कि स्कूल ने पब्लिक सेक्टर इक्वेलिटी ड्यूटी (सार्वजनिक क्षेत्र में समानता के कर्तव्य) का उल्लंघन किया है और बच्चे के यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन अधिकारों अनुच्छेद 9 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 14 (भेदभाव पर रोक) में दखल दिया है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, पिता का आरोप है कि नवंबर 2025 में जब बच्चा आठ साल का था तब स्कूल के स्टाफ ने उससे उसके तिलक-चांदलो के बारे में सवाल किया और कहा कि इसकी अनुमति नहीं है। बच्चे के माता-पिता ने स्कूल को पत्र लिखकर बताया कि उनका बेटा चार साल से इसे लगा रहा है और स्कूल की यूनिफॉर्म पॉलिसी में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इसे रोकता हो।
स्कूल ने पिता के दावों को किया खारिज
12 दिसंबर को लड़के को स्कूल काउंसिल से हटा दिया गया, जहां वह अपनी कक्षा का प्रतिनिधि था। इसके बाद स्कूल ने एक नई यूनिफॉर्म पॉलिसी लागू की, जिसमें धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगा दी गई।
जनवरी 2026 में माता-पिता ने अपने बच्चे को स्कूल से निकाल लिया। स्कूल ने अपना पक्ष रखते हुए इन सभी दावों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्होंने लड़के के साथ कोई गैर-कानूनी भेदभाव नहीं किया है।
स्कूल का कहना है, "मांगकर्ता के माथे पर तिलक-चांदलो लगाने पर रोक लगाने से उसे हिंदू धर्म का पालन करने से नहीं रोका गया।" स्कूल ने आगे कहा, "इस बात को लेकर जायज चिंताएं थीं कि अगर उसे तिलक-चांदलो लगाने की अनुमति दी जाती तो इसके गंभीर नकारात्मक परिणाम हो सकते थे, जिसमें छात्रों के बीच आपसी तालमेल का बिगड़ना भी शामिल है।"
स्कूल ने इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या वह लड़का स्वामीनारायण हिंदू धर्म का पालन करता है। स्कूल का कहना है, “माथे के बीच में रोजाना तिलक या निशान लगाना अनिवार्य नहीं है।”
साथ ही स्कूल के स्टाफ ने कथित तौर पर लड़के को यह सुझाव दिया था कि वह इस निशान को शरीर के ऐसे हिस्से पर लगाए जो ढका रहता हो। इस बात को लड़के के माता-पिता ने मानने से इनकार कर दिया।
लड़के के पिता की ओर से उसका प्रतिनिधित्व कर रहे आश्रय लॉ के निदेशक अंबरीश लिंबाचिया ने कहा, “यह मामला ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली में धार्मिक स्वतंत्रता और समानता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।”



