उरई में सरकारी सीमेंट की हो रही खुलेआम बिक्री, घर-घर पहुंच रही ‘पुनः बिक्री निषेध’ की बोरियां

उप्र के जालौन नगर में सरकारी सीमेंट की कथित अवैध बिक्री का मामला सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उरई में सरकारी सीमेंट की हो रही खुलेआम बिक्री, घर-घर पहुंच रही ‘पुनः बिक्री निषेध’ की बोरियां
Published By- Diwaker Mishra

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के जालौन नगर में सरकारी सीमेंट की कथित अवैध बिक्री का मामला सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सीमेंट की बोरियां निजी तौर पर बेची जा रही हैं।

खास बात यह है कि इन बोरियों पर स्पष्ट रूप से पुनः बिक्री निषेधलिखा हुआ है। इसके बावजूद कथित तौर पर रिक्शों के माध्यम से सीमेंट की बोरियां घर-घर पहुंचाई जा रही हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से नगर के अलग-अलग इलाकों में रिक्शों पर सरकारी सीमेंट की बोरियां ले जाते हुए लोगों को देखा जा रहा है।

आरोप है कि इन बोरियों को सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किए जाने के बजाय निजी जरूरत के लिए लोगों को बेचा जा रहा है। इससे सरकारी सामग्री के दुरुपयोग और उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि सीमेंट की बोरियों पर पुनः बिक्री निषेधअंकित है तो फिर यह सामग्री खुले बाजार अथवा निजी उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंच रही है।

सरकारी सीमेंट की आपूर्ति किस विभाग अथवा संस्था के माध्यम से हुई और इसके भंडारण तथा वितरण की जिम्मेदारी किसकी थी, इसकी जांच जरूरी है। साथ ही यह भी पता लगाने की आवश्यकता है कि सरकारी सीमेंट को निजी हाथों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका है।

स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान सीमेंट की बोरियों के बैच नंबर, आपूर्ति का रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और वितरण से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी सामग्री की कथित अवैध बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।