औरैया: रक्षाबंधन पर जिस भाई को बांधी राखी, उसकी अर्थी देख फूट-फूटकर रोईं चारों बहनें

रक्षाबंधन पर जिस इकलौते भाई की कलाई पर चारों बहनों ने राखी बांधी थी, सोमवार देर रात उसी भाई का शव जब औरैया के दिबियापुर पहुंचा तो बहनों का कलेजा फट पड़ा।

औरैया: रक्षाबंधन पर जिस भाई को बांधी राखी, उसकी अर्थी देख फूट-फूटकर रोईं चारों बहनें
Published By- Diwaker Mishra

औरैया से अरुण वाजपेयी की रिपोर्ट

औरैया/जनमत न्यूज़। रक्षाबंधन पर जिस इकलौते भाई की कलाई पर चारों बहनों ने राखी बांधी थी, सोमवार देर रात उसी भाई का शव जब औरैया के दिबियापुर पहुंचा तो बहनों का कलेजा फट पड़ा। कोई पवन के शव के पास सिर रखकर उसे पुकार रही थी तो कोई उसके चेहरे को निहारकर बिलख रही थी।

जैसे उन्हें अब भी उम्मीद हो कि भाई उठ जाएगा और सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। मां बार-बार अपने लाल का मुंह देखने को बेसुध हो जा रही थीं, जबकि पिता विशंभर सिंह एक कुर्सी पर बैठकर बेटे के गम में बेसुध नजर आए। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।

दिबियापुर कस्बे के कैलाश बाग, बाबू दयारामनगर निवासी रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह का इकलौता बेटा पवन कुमार दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल गिरने से जान गंवाने वाले छह छात्रों में शामिल था। भविष्य संवारने दिल्ली गया पवन महज दो महीने बाद ही परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गया।

राखी की खुशियां बनीं आखिरी याद

पवन रक्षाबंधन पर घर आया था। चारों बहनों ने उसे राखी बांधी थी। इसके बाद उसने परिवार के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाया। शनिवार को वह दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। रविवार को हॉस्टल पहुंचने के बाद ही बिल्डिंग धराशायी हो गई। जिस भाई को बहनों ने हंसते-खेलते विदा किया था, सोमवार रात उसी का शव घर पहुंचा।

हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में बेचैनी फैल गई। दिल्ली में रह रही बहन प्रियांशी हॉस्टल पहुंची और घंटों भाई की तलाश करती रही। देर रात उसे पवन की मौत की सूचना मिली। सोमवार सुबह पिता अपनी बेटी के साथ दिल्ली रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर देर रात घर पहुंचे तो पहले से गम में डूबे परिवार का दुख और गहरा गया।

दो महीने पहले शुरू हुआ था नया सफर

पवन ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज दिबियापुर से इंटर की परीक्षा पास की थी। बीते 20 जुलाई को ही उसका दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में प्रवेश हुआ था। पढ़ाई पूरी कर बेहतर भविष्य बनाने का सपना लेकर वह दिल्ली गया था, लेकिन हादसे ने परिवार की सारी उम्मीदें छीन लीं।

पवन चार बहनों के बीच इकलौता भाई था। बहनों के लिए वह केवल भाई नहीं, बल्कि परिवार का सहारा और खुशियों का केंद्र था। उसकी बहन प्रियांशी पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर गर्ल्स हॉस्टल में रह रही है। इसी कारण परिवार का दिल्ली से जुड़ाव भी था।

पवन की मां मीरा देवी मानसिक रूप से बीमार हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी हालत बिगड़ने की आशंका के चलते उन्हें अभी तक इस दुखद घटना की जानकारी नहीं दी गई है। रिश्तेदारों का घर पहुंचना शुरू हो गया है। मोहल्ले के लोग भी हादसे से हतप्रभ हैं। जिस घर में बेटे के भविष्य को लेकर उम्मीदें थीं, वहां अब मातम पसरा है।