उरई: उप जिलाधिकारी न्यायिक के न्यायालय का अधिवक्ताओं ने किया बहिष्कार, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

उप्र के उरई के जिलाधिकारी कार्यालय में बने जिला बार भवन के सभागार में अधिवक्ताओं ने 21 जुलाई को बैठक कर उप जिलाधिकारी न्यायिक की न्यायालय का बहिष्कार किया।

उरई: उप जिलाधिकारी न्यायिक के न्यायालय का अधिवक्ताओं ने किया बहिष्कार, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
Published By- Diwaker Mishra

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के उरई के जिलाधिकारी कार्यालय में बने जिला बार भवन के सभागार में अधिवक्ताओं ने 21 जुलाई को बैठक कर उप जिलाधिकारी न्यायिक की न्यायालय का बहिष्कार किया।

22 जुलाई को यह मालूम हुआ क्योंकि 21 जुलाई को उप जिलाधिकारी न्यायिक की न्यायालय लगी नहीं थी बैठक की अध्यक्षता कलक्ट्रेट प्रभारी और जिला बार संघ के उपाध्यक्ष ओम नारायण निरंजन ने की।

1.अधिवक्ताओं के तर्क प्रस्तुत किए जाने पर असहमति दर्शायी जाती है इसके अलावा वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ताओं को धारा 229 बायनेस्क तहत दबाव बनाते है।                                    

2.किसी अधिवक्ता को पूर्ण सुने बगैर अपने तर्क प्रस्तुत करने लगते है उसे ही अंतिम मानने लगते है ।

3.वादकारियों के समक्ष अधिवक्ताओं को अपमानित करना।

4.लंबे समय तक स्वयं पीठासीन होकर स्वयं व्याख्यान देकर अधिवक्ताओं को किसी अन्य न्यायालय में जाने से वंचित करना।                   

5.न्यायालय में अधिवक्ताओं की पूरी वीडियो ग्राफी कराना तथा निरंकुशतापूर्ण दबाव बनाकर अपनी बात की स्वीकार कराना।

6.न्यायालय में अपनी सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, विधिज्ञाता का प्रमाण देना आदि आरोप लगाए गए।

साथ ही जिलाधिकारी से अधिवक्ताओं ने  मांग की उप जिलाधिकारी न्यायिक के कार्य वापस लिया जाय। अधिवक्ताओं ने ज्ञापन में यह भी कहा कि 23 जुलाई तक यदि समाधान नहीं हुआ तो अनवरत अनिश्चितकाल तक उप जिलाधिकारी न्यायिक रिंकू सिंह राही की न्यायालय के कार्य से विरत रहेंगे। 

वहीं दूसरी ओर उप जिलाधिकारी न्यायिक रिंकू सिंह राही आईएएस ने कहा कि कि अधिवक्ताओं द्वारा जो आरोप लगाए गए वो निराधार है। यदि कोई साक्ष्य अधिवक्ताओं के पास हो तो दें। साक्ष्य के तौर पर न्यायालय की प्रतिदिन वीडियोग्राफी कराई जाती है इसमें न्यायालय की सम्पूर्ण कार्रवाई देखी जा सकती है।

उन्होंने जिला बार संघ के अधिकारियों से अनुरोध किया कि बिंदुवार नाराजगी बताएं जिससे मुझे अपनी गलती मालूम हो सके। उन्होंने उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि कौन सी मांग मानने लायक है और कौन सी मांग मानने लायक नहीं है ये देखने के बाद मालूम होगा।

उन्होंने उच्च न्यायालय के नियमों का पालन करते हुए न्यायालय की सुनवाई की जिसमें 7 मुकदमों सुने गए सभी वाद के वादी सामने थे। यूट्यूब वीडियो के माध्यम से  कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था के लिए वीडियोग्राफी कराई जा रही है।

इसमें दोनों पक्षों की वीडियो बनती है और यूट्यूब चैनल पर डाली जाती है जिसको दुनिया में कोई भी देख सकता है। फिलहाल जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि जो उचित कार्रवाई होगी उसको करेंगे।