प्रतापगढ़ का मनगढ़ धाम बना ऐतिहासिक साक्षात्कार का साक्षी, इन बौद्धिक प्रतिभाओं ने बनाई अंतिम आठ में जगह

उप्र के प्रतापगढ़ जनपद में 24 अगस्त से शुरू हुई विचार, संवाद और प्रतिभा की अनूठी यात्रा अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है।

प्रतापगढ़ का मनगढ़ धाम बना ऐतिहासिक साक्षात्कार का साक्षी, इन बौद्धिक प्रतिभाओं ने बनाई अंतिम आठ में जगह
Published By- Diwaker Mishra

प्रतापगढ़ से विकास गुप्ता की रिपोर्ट

प्रतापगढ़/जनमत न्यूज़। उप्र के प्रतापगढ़ जनपद में 24 अगस्त से शुरू हुई विचार, संवाद और प्रतिभा की अनूठी यात्रा अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। अजगरा अष्टकी तलाश पूरी हो चुकी है और प्रतापगढ़ को अंतिम आठ बौद्धिक प्रतिभाएं मिल गई हैं। अब इन्हीं आठ प्रतिभागियों में से किसी एक को आज के युधिष्ठिरके रूप में चुना जाएगा।

अंतिम आठ में अनुपम मौर्य, राजेन्द्र बहादुर पटेल, डॉ. साधना द्विवेदी, प्रज्ज्वल शुक्ल, विवेक सिंह, धीरज कुमार, योगेश प्रताप सिंह और आस्था द्विवेदी ने अपनी प्रतिभा, तर्कशक्ति, संवाद क्षमता और विचारों के दम पर जगह बनाई है।

इस यात्रा की खास बात यह रही कि इसका प्रतापगढ़ से पहला साक्षात्कार कृष्ण धाम मनगढ़ की पावन धरती पर हुआ। आयोजकों के अनुसार, विचारों और संवाद की इस यात्रा को कृष्ण धाम में मिला पहला मंच अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है।

प्रतापगढ़ की बौद्धिक क्षमता के प्रतिनिधि हैं आठों प्रतिभागी अजगरा अष्टमें पहुंचे ये आठ प्रतिभागी केवल प्रतियोगिता के अंतिम आठ नाम नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ की बौद्धिक क्षमता, संवाद परंपरा और नई सोच के प्रतिनिधि माने जा रहे हैं।

सभी प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा के बल पर इस मुकाम तक पहुंच बनाई है। अब मुकाबला सिर्फ जीत और हार का नहीं होगा, बल्कि तर्क की मजबूती, विचारों की गहराई और संवाद की प्रभावशीलता की कसौटी पर होगा। सबकी निगाहें अब इस सवाल पर टिकी हैं कि इन आठ प्रतिभाओं में से आज का युधिष्ठिरकौन बनेगा किसके तर्क सबसे प्रभावशाली होंगे?

किसके विचारों में सबसे अधिक गहराई होगी कौन संवाद की कसौटी पर खरा उतरेगा और किसके सिर सजेगी युधिष्ठिरकी प्रतिष्ठित उपाधि फिलहाल प्रतापगढ़ के सामने अजगरा अष्टके ये आठ नाम हैं-अनुपम मौर्य, राजेन्द्र बहादुर पटेल, डॉ. साधना द्विवेदी, प्रज्ज्वल शुक्ल, विवेक सिंह, धीरज कुमार, योगेश प्रताप सिंह और आस्था द्विवेदी।

अब इंतजार उस एक नाम का है, जिसे आज का युधिष्ठिरके रूप में याद किया जाएगा। सभी आठ प्रतिभाओं को शुभकामनाएं।