रायबरेली: आठ साल से जांच की आस, 28 लाख के पंचायत भवन पर सवाल; शिकायतकर्ता को कार्रवाई का इंतजार

उप्र के रायबरेली जनपद के ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धनराशि के कथित दुरुपयोग की शिकायत पिछले करीब आठ वर्षों से अधिकारियों की चौखट पर घूम रही है,

रायबरेली: आठ साल से जांच की आस, 28 लाख के पंचायत भवन पर सवाल; शिकायतकर्ता को कार्रवाई का इंतजार
Published By- Diwaker Mishra

रायबरेली से महताब खान की रिपोर्ट

रायबरेली/जनमत न्यूज़। उप्र के रायबरेली जनपद के ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धनराशि के कथित दुरुपयोग की शिकायत पिछले करीब आठ वर्षों से अधिकारियों की चौखट पर घूम रही है, लेकिन शिकायतकर्ता को अब तक निर्णायक कार्रवाई का इंतजार है। मामला खीरों थाना क्षेत्र के ग्राम नुनैरा से जुड़ा है, जहां वर्ष 2015 से 2020 के बीच कराए गए विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

ग्राम निवासी अंजनी कुमार पुत्र स्व. रामराज ने तत्कालीन ग्राम प्रधान सुनीता, तत्कालीन प्रधान प्रतिनिधि बबलू उर्फ रणधीर तथा तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी शेफाली जायसवाल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई कार्यों में जमीन पर हुए विकास और सरकारी अभिलेखों में दर्शाए गए विकास के बीच अंतर की जांच आवश्यक है।

28 लाख के निर्माण ने खड़े किए सवाल

शिकायत के आधार पर वर्ष 2024 में प्रकरण की जांच समाज कल्याण विभाग, रायबरेली को सौंपी गई थी। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को समाज कल्याण विभाग के अधिकारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और मौके पर जांच की। इस दौरान करीब 28 लाख रुपये की लागत से निर्मित पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय की स्थिति का निरीक्षण किया गया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, मौके पर जाँच टीम ने उससे उसकी मांग पूछी। अंजनी कुमार का कहना है कि उसने अधिकारियों के सामने स्पष्ट किया कि उसकी मांग किसी व्यक्तिगत लाभ की नहीं, बल्कि सरकारी धनराशि के दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर धनराशि की वसूली की है।

शिकायतें कई स्तरों पर, कार्रवाई का इंतजार

शिकायतकर्ता के अनुसार उसने मामले को लेकर खंड विकास अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी स्तर तक कई बार शिकायतें कीं। इसके अलावा शासन स्तर पर भी प्रकरण को उठाया गया।

शिकायतकर्ता का दावा है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जांच का अंतिम परिणाम और दोषियों पर कार्रवाई अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शिकायत सही है तो सरकारी धन की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और यदि शिकायत गलत है तो उसे खारिज करने का स्पष्ट आधार क्या है?

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले थाने में रखे जाने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसके मुताबिक, 23 अगस्त 2026 की रात करीब 9:30 बजे खीरों पुलिस उसे थाने ले गई और 24 अगस्त को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद लगभग 12:20 बजे छोड़ा गया।

अंजनी कुमार का सवाल है कि उसे किस कारण से थाने में रखा गया और क्या इसका उसकी भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत से कोई संबंध था? शिकायतकर्ता ने इस पूरे घटनाक्रम की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सरकारी धन की जांच चाहिए, व्यक्तिगत लाभ नहीं

अंजनी कुमार का कहना है कि करीब आठ वर्षों से शिकायतों के निस्तारण के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने में उसे आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ी है। उसका दावा है कि इस दौरान उसे तीन लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई। अब शिकायतकर्ता ने प्रशासन से समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा है कि 20 सितंबर 2026 तक निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए।

अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर

मामला केवल एक ग्रामीण की शिकायत तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि जिस प्रकरण की जांच वर्ष 2024 में सौंपे जाने की बात कही जा रही है और जिसमें जुलाई 2026 में मौके पर जांच भी की गई, उसमें अब तक अंतिम निष्कर्ष क्या निकला?

क्या पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय समेत अन्य विकास कार्यों की तकनीकी एवं वित्तीय जांच होगी? क्या भुगतान से जुड़े अभिलेखों का मिलान मौके के कार्यों से कराया जाएगा? और यदि सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों से वसूली कब होगी?

आठ साल की शिकायत में खर्च हुए तीन लाख से ज्यादा, अब भरपाई कौन करेगा?

शिकायतकर्ता अंजनी कुमार का कहना है कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की शिकायत को लेकर पिछले करीब आठ वर्षों से वह अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। उसके मुताबिक, शिकायतों और जांच के सिलसिले में अब तक तीन लाख रुपये से अधिक की रकम उसके आने-जाने, दस्तावेज तैयार कराने और अन्य खर्चों में खर्च हो चुकी है।

अंजनी कुमार का सवाल है कि यदि जांच में उसकी शिकायत सही पाई जाती है और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो आठ वर्षों में शिकायत की पैरवी करते हुए उसके द्वारा खर्च की गई रकम की भरपाई कौन करेगा?

क्या इसकी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार उठाएगी या फिर उन अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, जिन पर शिकायतकर्ता गलत या अधूरी रिपोर्ट लगाने का आरोप लगा रहा है?

अब देखना यह है कि प्रशासन आठ साल पुराने इस मामले में केवल जांच की औपचारिकता पूरी करता है या सरकारी धन, जांच की गुणवत्ता और शिकायतकर्ता के आरोपों- तीनों की जिम्मेदारी तय करते हुए कोई ठोस कार्रवाई भी करता है।