संभल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बीजेपी पर बोला तीखा हमला, कहा- इनका हिंदुत्व वास्तविक नहीं

उप्र के संभल जनपद में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को हिंदुओं की पार्टी बताने वाली बीजेपी और उसके हिंदुत्व पर तीखा हमला बोला है।

संभल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बीजेपी पर बोला तीखा हमला, कहा- इनका हिंदुत्व वास्तविक नहीं
Published By- Diwaker Mishra

संभल से राम व्रेश यादव की रिपोर्ट  

संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल जनपद में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को हिंदुओं की पार्टी बताने वाली बीजेपी और उसके हिंदुत्व पर तीखा हमला बोला है।

आयोजित सभा के दौरान उन्होंने बीजेपी के हिंदुत्व को "नकली" बताते हुए योगी सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। हालांकि, संभल में विलुप्त तीर्थ के जीर्णोद्धार के फैसले का उन्होंने स्वागत किया।

शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्ठि गौ-रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा संभल जनपद में पहुंची। शहर के रायसत्ती क्षेत्र स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संभल में मुसलमानों के कब्जे वाली जगह से तीर्थ का जीर्णोद्धार कराना सराहनीय कदम है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब काशी में पौराणिक मंदिरों और उनकी मूर्तियों को तोड़ा गया, तब सरकार का हिंदुत्व कहां था? उनका आरोप था कि जिन मंदिरों पर पहले से हिंदुओं का अधिकार था, उन्हें भी ध्वस्त कर दिया गया और मूर्तियां नालों में फेंक दी गईं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इतिहास सरकार के कार्यों का आकलन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं के साथ अन्याय करने वालों में कुछ लोग औरंगजेब से भी आगे निकल गए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक पंजीकृत राजनीतिक दल हो सकती है, लेकिन उसका हिंदुत्व वास्तविक नहीं है।

उनके अनुसार, "जो वेद-शास्त्रों को नहीं मानते, गुरु परंपरा का सम्मान नहीं करते और हिंदू संस्कृति के मूल सिद्धांतों का पालन नहीं करते, वे असली हिंदू नहीं हो सकते, उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू संस्कृति में पारिवारिक मूल्यों और चरित्र का विशेष महत्व है। समलैंगिकता और व्यभिचार से जुड़े कानूनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे प्रावधान हिंदू संस्कृति के अनुरूप हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो राजनीतिक दल हिंदू संस्कृति के विपरीत कार्य करते हैं, उन्हें हिंदू पार्टी नहीं कहा जा सकता। उनका आरोप था कि सार्वजनिक मंचों पर कुछ दल खुद को हिंदुओं की पार्टी बताते हैं, लेकिन चुनाव आयोग में पंजीकरण के समय खुद को धर्मनिरपेक्ष घोषित करते हैं।

उन्होंने कहा कि देश में पंजीकृत सभी राजनीतिक दल संविधान और चुनाव आयोग के नियमों के तहत धर्मनिरपेक्ष होने की घोषणा करते हैं। ऐसे में खुद को केवल हिंदुओं की पार्टी बताना विरोधाभासी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इन बयानों ने एक बार फिर हिंदुत्व और राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां उन्होंने संभल में सरकार के एक कदम की सराहना की, वहीं काशी और हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी और योगी सरकार की कड़ी आलोचना भी की। अब इन बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।