अपने चिकित्सक की मौत के इंतज़ार में चिकित्सा विभाग

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर एक बार फिर संवेदनहीनता और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला मुरादाबाद में तैनात एक चिकित्साधिकारी के स्थानांतरण से जुड़ा है, जो खुद गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

अपने चिकित्सक की मौत के इंतज़ार में चिकित्सा विभाग

Special Report- Rajnish Chhabi 

लखनऊ/जनमत न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर एक बार फिर संवेदनहीनता और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला मुरादाबाद में तैनात एक चिकित्साधिकारी के स्थानांतरण से जुड़ा है, जो खुद गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

जानकारी के अनुसार, डॉ. प्रीतपाल सिंह सलूजा वर्तमान  में मुरादाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के अधीन चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। वह स्टेज-3 कैंसर के मरीज हैं और इसके अलावा किडनी संबंधी बीमारी तथा डायबिटीज जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी पीड़ित हैं। उनका इलाज लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में लंबे समय से चल रहा है।


डॉ. सलूजा को मुरादाबाद में तैनाती के चलते उन्हें नियमित इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए उन्होंने लखनऊ या आसपास स्थानांतरण की मांग की थी। उनकी पत्नी रूपम सलूजा ने भी विगत 03 वर्षों में कई बार मानवीय आधार पर स्थानान्तरण हेतु आवेदन किए, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी।


बताया जाता है कि इस मामले में एक विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर डॉ. प्रीतपाल सिंह सलूजा वर्तमान में मुरादाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के अधीन चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात के स्थानान्तरण के लिए नवम्बर 2025 में अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा डॉ. सलूजा के स्थानान्तरण के लिए अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) से पत्रावली भी मांगी थी, सूत्रों के मुताबिक लगभग ०6 माह होने को है इस पर अब तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई गई। उल्लेखनीय है कि पत्र लिखने वाले विधायक का अब निधन हो चुका है। लेकिन अभी तक डॉ. प्रीतपाल सिंह सलूजा के स्थानांतरण सम्बन्धी कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है| शायद विभाग अब डॉ. सलूजा के मौत का इन्तजार कर रहा है |


इसी बीच अत्यधिक कार्य दबाव के कारण डॉ. सलूजा की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। वर्तमान में वे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां वह जिन्दगी और मौत से जूझ रहे है।


बतादेंकि यह प्रदेश का पहला मामला नहीं है जब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों के स्थानांतरण उनके निधन के बाद किए गए।


सूत्रों का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग में स्थानांतरण से जुड़े मामलों में कथित तौर पर वजनयानी प्रभाव या लेनदेन की भूमिका अहम हो गई है। इस मामले में भी अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य के पास डॉ. प्रीतपाल सिंह सलूजा के स्थानान्तरण की पत्रावली 04 महीने तक रुकी रही| जिसके बाद अब मिली जानकारी के अनुसार डॉ. सलूजा के स्थानान्तरण सम्बन्धी पत्रावली लगभग एक सप्ताह से विभागीय मंत्री के पास रुकी है, क्या वहाँ भी वजनयानी प्रभाव या लेनदेन का इन्तजार किया जा रहा है? बतादेंकि अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य के पास स्थानान्तरण सम्बंधित पत्रावली जो मुख्यमंत्री कार्यालय से भी मांगी गई होती है उसे भी कई कई महीने बीत जाने के बाद नहीं भेजी जाती है इससे साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य का कार्यालय के टेबल पर जबतक वजनयानी प्रभाव या लेनदेन नहीं किया जाता तब तक पत्रावली ‘वजन’ यानी प्रभाव या लेनदेन के इन्तजार में लंबित रहती है |

अब सवाल यह है कि क्या एक गंभीर रूप से बीमार चिकित्साधिकारी का स्थानांतरण भी प्रभाव और लेनदेन पर निर्भर करेगा? और क्या स्वास्थ्य विभाग मानवीय आधार पर त्वरित निर्णय लेने में सक्षम नहीं है?

फिलहाल इस पूरे मामले में जवाब से ज्यादा सवाल हैं। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाती है।