बहराइच: बाढ़ग्रस्त इलाकों में कुदरत की दोहरी मार, घरों में भरा पानी; नदी में समा रहीं फसलें
नेपाल के पहाड़ों पर हो रही मुसीबत की बारिश की वजह से मैदानी इलाकों की नदियाँ उफान पर हैं। नतीजा यह हैं कि उप्र के बहराइच जनपद में घाघरा नदी जमकर तांडव मचा रही है।
बहराइच से रिजवान खान की रिपोर्ट
बहराइच/जनमत न्यूज़। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही मुसीबत की बारिश की वजह से मैदानी इलाकों की नदियाँ उफान पर हैं। नतीजा यह हैं कि उप्र के बहराइच जनपद में घाघरा नदी जमकर तांडव मचा रही है।
बहराइच के मोतीपुर और महसी तहसील क्षेत्र में किसानों की लहलहाती फसलें नदी की तेज धारा में समाहित हो रही है। धर्मपुर रेतिया, खैरी पुरवा और धनियाबेली गाँव के किसानों का कहना है कि नदी की तेज धारा ने सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन पर खड़ी फसलों को समाहित कर लिया है।
किसानों का ये भी कहना है कि अगर इसी तरह नदी कटान करती रही तो कई गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। किसानों ने बताया कि चहलवा गाँव पूरी तरह से नदी में समाहित हो चुका है। खेतों में खड़ी किसानों की फैसले नदी में समाहित हो चुकी हैं।
एक तरफ गाँव और किसानों के घरों में भरा बाढ़ का पानी परेशानी का सबब बन रहा है दूसरी तरफ लहलहाती धान और गन्ने की फसलें नदी में समाहित होकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा रही है।
किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समाहित हो रही है। इस मामले पर उप जिलाधिकारी मोनालिसा जौहरी ने कहा कि बाढ़ खत्म हो जाने के बाद वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा और किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
वहीं जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान समय में दो तहसीलों के डेढ़ दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और फैसले नदी में समाहित हो रही हैं हालांकि बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद और सहायता दी जा रही है जमीन जो नदी में समाहित हो रही है उसका आकलन बाढ़ के बाद किया जाएगा और किसानों को फसलों का मुआवजा दिया जाएगा।




