मिर्जापुर: विद्यालय पहुंचने के लिए नहीं है रास्ता, मासूम बच्चों ने किया धरना प्रदर्शन

उप्र के मिर्जापुर जिले के चेरुईराम ग्राम सभा में विद्यालय पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। 470 बच्चों की संख्या वाले कम्पोजिट विद्यालय चेरुईराम के रास्ते पर किचड़ से होकर मासूम बच्चों और शिक्षको का आवागमन होता है।

मिर्जापुर: विद्यालय पहुंचने के लिए नहीं है रास्ता, मासूम बच्चों ने किया धरना प्रदर्शन
Published By- Diwaker Mishra

मिर्जापुर से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट

मिर्जापुर/जनमत न्यूज़। उप्र के मिर्जापुर जिले के चेरुईराम ग्राम सभा में विद्यालय पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। 470 बच्चों की संख्या वाले कम्पोजिट विद्यालय चेरुईराम के रास्ते पर किचड़ से होकर मासूम बच्चों और शिक्षको का आवागमन होता है।

जिसको लेकर न तो ग्राम प्रधान और ना ही कोई जन प्रतिनिधि ध्यान दे रहा है। मासूम बच्चों को अपनी मांग बनवाने के लिए और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विद्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करना पड़ा। जिसकी तस्वीरें जन प्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती हैं।

वैसे भी आए दिन जनप्रतिनिधियों की कार्य शैली पर सन्देह पैदा होता है कि जो जनता के लिए चुन करके जाते हैं वह ग्राम प्रधान हो, सांसद हो या विधायक, जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते।

चुनाव जीतने के बाद ग्राम प्रधान से लेकर सांसद विधायक सभी अपनी जुगत भिड़ाने में लगे रहते हैं। विकास कार्यों में कमिश्नर का बड़ा खेल होता है लेकिन यह ग्राम सभा के छात्रों के भविष्य का सवाल होता है और यहां से पढ़कर के निकलने वाले बच्चे सांसद विधायक आईएएस पीसीएस शिक्षक भी होते हैं लेकिन उनके विद्यालय तक पहुंचाने का जिम्मेदारों द्वारा समुचित प्रबंध नहीं किया गया तो इसका बीड़ा बच्चों ने खुद उठाया की विद्यालय के सामने अपने लिए रास्ता बनवाने के लिए धरना प्रदर्शन का सहारा लिया।

जब यह मामला ऊपर तक पहुंचा तो सभी के हाथ पाव फूलने लगे तो तत्काल मौके पर नायब तहसीलदार व खंड विकास अधिकारी सिटी ब्लाक मिरजापुर व ग्राम प्रधान व सचिव की मौजूदगी में तत्काल 5 फुट के रास्ते का निर्माण करने का कार्य किया है।

आखिर क्या भारतीय संविधान में यही व्यवस्था है अपने हक और हुकुक के लिए नौनिहालो का धरना प्रदर्शन ही आवश्यक है या जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारीया सरकार द्वारा जो नामित अधिकारी किए जाते हैं। वह ग्राम सभा के विकास कार्यों का जायजा किस तरह से लेते हैं यह भी उनकी कार्यशैली पर बड़ा सवाल पैदा करता है जिसका जीता जागता उदाहरण बना मिर्जापुर जिले का कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम।