मुजफ्फरनगर: ऑपरेशन टेबल पर बुझ गई एक मां की जिंदगी, हॉस्पिटल पर गंभीर सवाल; स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न
उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भारद्वाज हॉस्पिटल में गर्भवती महिला कोमल की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भारद्वाज हॉस्पिटल में गर्भवती महिला कोमल की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
परिजनों के आरोप इतने गंभीर हैं कि यदि जांच में सही पाए गए तो यह मामला केवल चिकित्सकीय लापरवाही नहीं बल्कि मानव जीवन के साथ खिलवाड़ का प्रतीक बन सकता है।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में अनुभवी और योग्य चिकित्सकों की मौजूदगी के दावों के बावजूद ऑपरेशन प्रशिक्षु डॉक्टरों से कराया जा रहा था।
उनका कहना है कि ऑपरेशन के दौरान महिला की हालत बिगड़ती रही, लेकिन समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप एक परिवार ने अपनी बहू, पत्नी और मां को हमेशा के लिए खो दिया, जबकि नवजात बच्ची सुरक्षित बच गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व में कराए गए अल्ट्रासाउंड को अस्पताल प्रबंधन ने स्वीकार नहीं किया और अपने कथित परिचित चिकित्सक से दोबारा जांच कराई गई।
इतना ही नहीं, ऑपरेशन के बाद महिला के सोने के कुंडल, चेन और अन्य आभूषण गायब होने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। यदि अस्पताल में नियमों के विपरीत कार्य हो रहे थे तो विभागीय निरीक्षणों में यह सब क्यों नहीं पकड़ा गया? क्या अस्पताल के संचालन, डॉक्टरों की योग्यता और उपचार व्यवस्था की नियमित जांच की गई थी? यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी है। सूत्रों के अनुसार मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अस्पताल की कार्यप्रणाली और उपचार संबंधी अभिलेखों की जांच कर रही है।
जनपद में लगातार सामने आ रही अस्पतालों की लापरवाही की शिकायतों के बीच यह मामला लोगों के मन में भय पैदा कर रहा है। आखिर मरीज अस्पतालों में इलाज कराने जाते हैं या अपनी जान जोखिम में डालने? अब सभी की निगाहें पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी हैं।
यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जो भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।


