समझौते से खत्म करें मुकदमे, समय व धन दोनों की बचत: मुजफ्फरनगर में न्यायाधीश ने दी लोक अदालत की जानकारी

उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जनमत न्यूज के संवाददाता संजय कुमार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से विशेष बातचीत की।

समझौते से खत्म करें मुकदमे, समय व धन दोनों की बचत: मुजफ्फरनगर में न्यायाधीश ने दी लोक अदालत की जानकारी
Published By- Diwaker Mishra

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जनमत न्यूज के संवाददाता संजय कुमार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से विशेष बातचीत की।

बातचीत के दौरान डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है। ऐसे मामलों का निस्तारण आपसी सुलह-समझौते के आधार पर किया जाता है, जिनमें कानून के अनुसार समझौता संभव है।

लंबे मुकदमों से मिल सकती है राहत

उन्होंने बताया कि लोक अदालत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। आपसी सहमति से विवाद का समाधान होने पर समय और धन दोनों की बचत होती है और वर्षों से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने का अवसर मिलता है।

लोक अदालत के प्रमुख फायदे

जल्दी विवाद का निस्तारण होने से लंबे समय तक मुकदमा चलाने की परेशानी कम होती है।

समय की बचत होती है और पक्षकार बार-बार अदालत आने की परेशानी से बच सकते हैं।

न्यायिक खर्च में कमी आती है, क्योंकि समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त किया जा सकता है।

आपसी सहमति से समाधान होने के कारण दोनों पक्षों के बीच विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त करने का अवसर मिलता है।

लोक अदालत में समझौते के आधार पर निस्तारित मामलों में दोनों पक्षों की सहमति महत्वपूर्ण होती है।

लोक अदालत का उद्देश्य केवल मुकदमा खत्म करना नहीं, बल्कि विवाद का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान उपलब्ध कराना भी है।

इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में भी मदद मिलती है।

लोक अदालत में किन मामलों का हो सकता है निस्तारण?

सचिव ने बताया कि सिविल विवाद, बैंक एवं ऋण संबंधी मामले, मोटर दुर्घटना प्रतिकर से जुड़े मामले तथा शमनीय आपराधिक मामलों सहित ऐसे कई मामलों का निस्तारण लोक अदालत में किया जा सकता है, जिनमें कानून के तहत समझौते की अनुमति है।

उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि उनका मामला लोक अदालत में निस्तारित किए जाने योग्य है और दोनों पक्ष आपसी समझौते के लिए तैयार हैं, तो इस अवसर का लाभ उठाएं।

12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत

डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। संबंधित पक्षकार अपने मामले के संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर अथवा संबंधित न्यायालय से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत केवल मुकदमा समाप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि आपसी सहमति, सौहार्द और समझौते के जरिए विवाद का समाधान करने का महत्वपूर्ण मंच है। आमजन से अपील है कि पात्र मामलों में राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाकर समय और धन की बचत करें तथा आपसी सहमति से विवाद का समाधान करें।