संभल: मस्जिद ध्वस्तीकरण पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, प्रशासन ने कहा- सब कुछ कानूनी प्रक्रिया के तहत
उप्र के संभल जनपद के नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गांव में मुस्तफा कादरी मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है।
संभल से राम व्रेश यादव की रिपोर्ट
संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल जनपद के नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गांव में मुस्तफा कादरी मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। मस्जिद का मलबा हटाए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने पूरे मामले की जांच के लिए एक प्रतिनिधिमंडल गठित किया है।
उप्र कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं का एक दल संभल पहुंचा, जहां उन्होंने मस्जिद स्थल का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से बातचीत कर घटना की जानकारी जुटाई।
कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई राजस्व अभिलेखों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
संभल के कसेरुआ गांव में मुस्तफा कादरी मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में प्रशासन द्वारा मस्जिद के अवशेष और मलबे को हटाने की कार्रवाई के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक दल भी खुलकर सामने आने लगे हैं।
उप्र कांग्रेस कमेटी ने पूरे मामले की जांच के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। इसी क्रम में पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं की एक टीम संभल पहुंची। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष आरिफ तुर्की सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
संभल पहुंचने के बाद कांग्रेस नेताओं ने सबसे पहले कसेरुआ गांव का दौरा किया। उन्होंने उस स्थल का निरीक्षण किया, जहां प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने गांव के लोगों, स्थानीय निवासियों और आसपास रहने वाले परिवारों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
इस दौरान पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस मस्जिद का उल्लेख सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, उस पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को अपने ही अभिलेखों का सम्मान करना चाहिए। यदि किसी प्रकार का विवाद था, तो उसका समाधान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार विभिन्न मामलों में अलग-अलग मानक अपनाती है। उनका कहना है कि यदि कोई निर्माण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, तो उससे संबंधित सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि दौरे के दौरान जुटाई गई जानकारियों और स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपी जाएगी, जिसके बाद पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करेगी।
वहीं प्रशासन का पक्ष है कि कसेरुआ गांव में सुरक्षित श्रेणी की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत कार्रवाई की गई थी और उसी के अनुपालन में यह अभियान चलाया गया।
प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई विधिसम्मत और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है, फिलहाल कसेरुआ गांव का यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दायरे से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस अपनी जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है और प्रशासन इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।


