पतंजलि पर ‘घटिया घी’ बेचने का आरोप; कोर्ट ने लगाया जुर्माना, कंपनी ने कहा- आदेश ‘त्रुटिपूर्ण’

राज्य और केंद्रीय लैब में सैंपल फेल होने के बाद अदालत ने निर्माता, वितरक और रिटेलर पर जुर्माना लगाया; पतंजलि ने परीक्षण को अवैध बताया और फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील की तैयारी की।

पतंजलि पर ‘घटिया घी’ बेचने का आरोप; कोर्ट ने लगाया जुर्माना, कंपनी ने कहा- आदेश ‘त्रुटिपूर्ण’
Published By- A.K. Mishra

उत्तराखंड/जनमत न्यूज़:- योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद पर गाय का सब-स्टैंडर्ड घी बेचने का आरोप साबित होने के बाद पिथौरागढ़ की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अदालत ने घी के निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत का यह फैसला 19 नवंबर को आया, जिसकी कॉपी प्रशासन को हाल ही में प्राप्त हुई।

कैसे सामने आया मामला

पिथौरागढ़ के सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त आर.के. शर्मा के अनुसार, अक्टूबर 2020 में पतंजलि के गाय के घी के नमूने एकत्र किए गए।  नमूनों की जांच रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला में की गई, जहाँ घी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। व्यापारियों के अनुरोध पर सितंबर 2021 में सैंपल को केंद्र सरकार की रेफरल लैब भेजा गया, जहाँ 2022 में भी सैंपल फेल घोषित हुए। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने फरवरी 2022 में मामला SDM कोर्ट में दायर किया, जो अब जाकर निपटा।अदालत ने निर्माता पर 1.25 लाख रुपये, जबकि वितरक और खुदरा विक्रेता पर 15,000 रुपये का दंड लगाया है।

पतंजलि ने कोर्ट के आदेश को बताया ‘विधि-विरुद्ध’

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर बयान जारी करते हुए कहा कि अदालत का आदेश कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण और अस्वीकार्य है। कंपनी ने तीन प्रमुख आधार गिनाए: रेफरल लैब NABL-मान्यता प्राप्त नहीं थी, इसलिए उसकी रिपोर्ट वैध नहीं मानी जानी चाहिए। जिन पैरामीटर पर सैंपल को असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे। दोबारा परीक्षण सैंपल की एक्सपायरी डेट के बाद किया गया, जो कानून के अनुसार अमान्य है।

कंपनी ने कहा कि इन बिंदुओं पर विचार किए बिना ही अदालत ने आदेश पारित कर दिया, जिसके खिलाफ वे फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दाखिल कर रहे हैं।

घी को 'हानिकारक' नहीं बताया गया: पतंजलि

पतंजलि ने दावा किया कि फैसले में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि पतंजलि का घी उपयोग के लिए असुरक्षित है। कंपनी के अनुसार, घी में पाया गया अंतर सिर्फ RM Value से संबंधित है, जो प्राकृतिक कारणों जैसे — पशु आहार, जलवायु आदि — के अनुसार बदल सकता है।  कंपनी का कहना है कि RM Value में मामूली अंतर से घी की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।