एटा में 150 परिवारों ने आवास के लिए राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, 2002 में टूटे थे मकान

उप्र के एटा जनपद के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के सकीट रोड पर स्थित हिन्दूनगर मोहल्ले में करीब 150 परिवार लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे हैं।

एटा में 150 परिवारों ने आवास के लिए राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, 2002 में टूटे थे मकान
Published By- Diwaker Mishra

एटा से नंद कुमार की रिपोर्ट

एटा/जनमत न्यूज़। उप्र के एटा जनपद के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के सकीट रोड पर स्थित हिन्दूनगर मोहल्ले में करीब 150 परिवार लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे हैं।

इन परिवारों ने अपने आवास के लिए प्रशासन से मदद मांगी है। शुक्रवार को इन लोगों ने राष्ट्रपति के नाम SDM AR फारूखी एटा को एक ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में स्थानीय लोगों ने बताया कि हिन्दूनगर क्षेत्र में राजा गोविंदराय, अवागढ़ वालों की तरफ से करीब 150 परिवारों के मकान बने हुए थे। उनका आरोप है कि साल 2002 में भारतीय सेना ने इन मकानों को तोड़ दिया था।

मकान टूटने के बाद से ये परिवार बेघर हो गए और तब से झुग्गी-झोपड़ी में रहकर गुजारा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि करीब 24 सालों से आवास की यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच की जाए। उन्हें उसी जमीन पर दोबारा आवास बनाने की अनुमति दी जाए या कोई और जरूरी कार्रवाई की जाए, ताकि वे अपने परिवारों के साथ सुरक्षित रह सकें।

ज्ञापन में बताया गया कि लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ी में रहने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश, गर्मी और सर्दी के मौसम में इन परिवारों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से मानवीय आधार पर इस मामले में दखल देने और स्थायी आवास की व्यवस्था करने की मांग की है।

यह ज्ञापन शुक्रवार दोपहर 12 बजे एसडीएम अतिरिक्त एआर फारूकी के जरिए राष्ट्रपति को भेजा गया। ज्ञापन देने वालों में सदानंद गिहार, पवन लांगुरिया, अर्जुन, अजय, योगेश, रात्रि, शुलम, कलिया, रमन, राहुल, सुनील, सोनू, अनिल, मन्नू, रवि, शिशार, अमित, कृष्णा समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।

पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सालों से झुग्गी-झोपड़ी में रहने को मजबूर इन परिवारों को अब स्थायी आवास का इंतजार है।

इस दौरान सदानंद गिहार ने जानकारी देते हुए बताया सेना द्वारा वर्ष 2002 में जो मकान तोड़ दिए गए थे। हम लोगों का कोई निर्णय नहीं हुआ है हम लोगों को 24 साले हो गई झोपड़े में पन्नियों में रह रह रहे हैं हम लोग।जिस जगह हम लोग रह रहे हैं वहां घर हुआ करते थे।

सेना द्वारा तोड़े गए थे हमारी मांग है कि हम लोगों के घर मकान बनवाए जाएं क्योंकि छोटे छोटे बच्चे नशेबाजी में संलिप्त होते  जा रहे है शिक्षा नहीं है। आज तक किसी अधिकारी ने हमारी सुध नहीं ली है।