बलरामपुर: जमीन बेचकर जमा किए थे 22 लाख, बिना जानकारी हुआ 19.80 लाख का लोन; बैंक मैनेजर गिरफ्तार

उप्र के बलरामपुर जिले के श्रीदत्तगंज थाना क्षेत्र में एक बैंक ग्राहक की एफडी पर उसकी जानकारी के बिना 19.80 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कर गबन करने के मामले में पुलिस ने पूर्व शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है।

बलरामपुर: जमीन बेचकर जमा किए थे 22 लाख, बिना जानकारी हुआ 19.80 लाख का लोन; बैंक मैनेजर गिरफ्तार
Published By- Diwaker Mishra

बलरामपुर से गुलाम नबी कुरैशी की रिपोर्ट

बलरामपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के बलरामपुर जिले के श्रीदत्तगंज थाना क्षेत्र में एक बैंक ग्राहक की एफडी पर उसकी जानकारी के बिना 19.80 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कर गबन करने के मामले में पुलिस ने पूर्व शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोप है कि बैंक मैनेजर और सहायक प्रबंधक ने मिलकर बैंक का लक्ष्य पूरा करने के लिए ग्राहक की 22 लाख रुपये की एफडी बनवाई और फिर उसी पर ऋण स्वीकृत कर दिया।

मामला इंडियन बैंक की चमरूपुर महदेइया शाखा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, उतरौला कोतवाली क्षेत्र के नया नगर बिशुनपुर निवासी जनार्दन सिंह ने जमीन बेचकर प्राप्त 22 लाख रुपये बैंक खाते में जमा किए थे।

पीड़ित का आरोप है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक दिनेश कुमार पासवान और सहायक शाखा प्रबंधक निखिल कुमार पासवान ने दबाव बनाकर उसकी पूरी धनराशि की एफडी करा दी।

कुछ समय बाद जनार्दन सिंह को जानकारी हुई कि उनकी एफडी पर बिना अनुमति और बिना जानकारी के 19.80 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया गया है।

शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच की। जांच में आरोप सही पाए जाने पर श्रीदत्तगंज थाने में बीएनएस की धारा 316(5) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

इस मामले में सहायक शाखा प्रबंधक निखिल कुमार पासवान को पुलिस पहले ही 30 मई को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपी शाखा प्रबंधक की तलाश लगातार की जा रही थी।

पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी उतरौला राघवेन्द्र सिंह के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष अविरल शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी दिनेश कुमार पासवान को गोरखपुर जिले के चिलुआताल क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने सहायक प्रबंधक के साथ मिलकर बैंक का लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से खाताधारक की 22 लाख रुपये की एफडी कराई थी।

उसने यह भी माना कि खाताधारक को जानकारी दिए बिना एफडी की करीब 90 प्रतिशत राशि यानी 19.80 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कर उसके खाते में जमा कराया गया था।

इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहकों की जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है और आवश्यक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।