संभल के सौंधन किले को संरक्षित करने की कवायद, 21 परिवारों को दिए 100-100 वर्ग मीटर के पट्टे
उप्र के संभल जनपद के ऐतिहासिक सौंधन किले को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। किले के अंदर रह रहे 21 परिवारों को दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
संभल से रामव्रेश यादव की रिपोर्ट
संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल जनपद के ऐतिहासिक सौंधन किले को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। किले के अंदर रह रहे 21 परिवारों को दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गुरुवार को इन परिवारों को किले से करीब आधा किलोमीटर दूर शिव मंदिर के पास नवीन आबादी की जमीन पर 100-100 वर्ग मीटर के पट्टे दिए गए।
वहीं, पांच विधवा महिलाओं को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई है। पट्टा मिलने के बाद जहां कुछ परिवारों में खुशी दिखाई दी, वहीं कई लोग वर्षों पुराने घर को छोड़ने को लेकर भावुक नजर आए
पूरा मामला उत्तर प्रदेश के संभल के सौंधन गांव में स्थित ऐतिहासिक किले को संरक्षित करने के लिए प्रशासन ने किले के अंदर रह रहे परिवारों को दूसरी जगह बसाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार को 21 परिवारों को 100-100 वर्ग मीटर जमीन के पट्टे दिए गए। यह जमीन किले से करीब आधा किलोमीटर दूर शिव मंदिर के पास नवीन आबादी क्षेत्र में दी गई है.
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि इन परिवारों में पांच विधवा महिलाओं को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी उपलब्ध कराया जाएगा। जमीन का पट्टा मिलने के बाद कुछ परिवारों में खुशी देखने को मिली, लेकिन कई लोग अपने पुराने घर और किले से जुड़ी वर्षों पुरानी यादों को छोड़ने को लेकर भावुक नजर आए.
पट्टा वितरण कार्यक्रम में नेम सिंह, जोगेंद्र, शांति देवी, वीर सिंह, कमला देवी, प्रभा देवी, भोला देवी, रामसनेही, हरपाल सिंह, शिवम सिंह, जमुना सिंह, राकेश, कृष्ण गोपाल, माथुर, राजपाल, कोमल सिंह यादव, नेहाल सिंह, भारत, किरण पाल और राम रहीम समेत 21 परिवारों को पट्टे दिए गए। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह रिंकू, एसडीएम विकास चंद्र और तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.
शांति और नेमवती ने बताया कि नई जमीन मिलने की खुशी है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता अब मकान बनाने की है। उनके पास घर निर्माण के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार ने जमीन तो दे दी है, लेकिन उस पर घर बनाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत होगी.
किले में रहने वाले परिवारों का कहना है कि उनका इस ऐतिहासिक परिसर से कई पीढ़ियों पुराना रिश्ता है। नेम सिंह ने बताया कि उनके दादा और परदादा भी किले में रहते थे। परिवार को यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि उनके पूर्वज कितने समय से किले में रह रहे थे। उन्होंने बताया कि पुराने मकान का कुछ हिस्सा गिर चुका है, जबकि कुछ हिस्सा अभी भी मौजूद है.
नेम सिंह ने बताया कि किले में रहना उनके परिवार की कई पीढ़ियों की विरासत रही है। सरकार के फैसले के बाद उन्हें नई जगह जमीन मिली है, लेकिन पुराने मकान और किले को छोड़ने का भावनात्मक दुख भी है.
सोमपाल सिंह ने बताया कि उनके परिवार की करीब पांच पीढ़ियां किले में रहते हुए गुजर गईं। उन्होंने कहा कि वर्षों से बने घर को छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन सरकार का फैसला उन्हें मंजूर है। उनकी चिंता भी नई जगह मकान बनाने को लेकर है। उनका कहना है कि मकान निर्माण के लिए पर्याप्त पैसे की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी चुनौती है.
सोमपाल सिंह का कहना है कि नई जमीन मिलने से राहत मिली है, लेकिन मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है। वर्षों पुराने घर को छोड़ने का दुख जरूर है, लेकिन ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए सरकार के फैसले का सम्मान करते हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह रिंकू ने कहा कि सौंधन का किला एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। समय के साथ कुछ लोगों ने किले के अंदर अपने आवास बना लिए थे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसके इतिहास और महत्व को जान सकें.
उन्होंने यह भी कहा कि किले के अंदर रहने वाले सभी लोग भू माफिया नहीं थे। इनमें गरीब परिवार भी शामिल थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार और प्रशासन की ओर से 21 परिवारों को दूसरी जगह जमीन के पट्टे दिए गए हैं।
एसडीएम संभल विकास चंद्र ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर किले के अंदर रह रहे परिवारों को बाहर बसाने के लिए 100-100 वर्ग मीटर जमीन के पट्टे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पांच विधवा महिलाओं को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी उपलब्ध कराया जाएगा.




