उरई में किसान महापंचायत: बुंदेलखंड पैकेज और कर्जमाफी की मांग, फसलों के नुकसान में किसानो को मिले पर्याप्त मुआवजा
उप्र के उरई जनपद में आयोजित किसान महापंचायत में राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुंदेलखंड के लिए अलग पैकेज, किसानों की कर्जमाफी और फसल नुकसान की भरपाई की मांग उठाई।
उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट
उरई/जनमत न्यूज़। उप्र के उरई जनपद में आयोजित किसान महापंचायत में राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुंदेलखंड के लिए अलग पैकेज, किसानों की कर्जमाफी और फसल नुकसान की भरपाई की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे क्षेत्र के किसानों को विशेष राहत मिलनी चाहिए।
राठ रोड स्थित गल्ला मंडी परिसर में हुई महापंचायत में टिकैत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर किसान हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में बार-बार सूखा, अतिवृष्टि और फसल नुकसान किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहे हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग पलायन को मजबूर हैं।
टिकैत ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया था, लेकिन किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। उनके मुताबिक, खेती की लागत, डीजल, खाद, बीज और बिजली के बढ़ते खर्च के बीच किसानों पर कर्ज का बोझ कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने बुंदेलखंड के किसानों का कृषि ऋण माफ करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के लिए अलग से लाभ दिया जाए। खरीफ फसलों को अतिवृष्टि से हुए नुकसान का त्वरित सर्वे कराने, बीमा कंपनियों से शीघ्र भुगतान दिलाने और प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग भी महापंचायत में उठी।
एमएसपी और खनिज संपदा का मुद्दा
भाकियू नेता ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए C2+50 प्रतिशत का फार्मूला लागू करने की मांग दोहराई। यह मांग लागत के व्यापक आकलन पर आधारित लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने से जुड़ी है।
टिकैत ने बुंदेलखंड की खनिज संपदा में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की सरकारें उद्योगपतियों के हित में काम कर रही हैं, जबकि क्षेत्र के किसान और स्थानीय समुदाय संसाधनों का पर्याप्त लाभ नहीं पा रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और इसे निरस्त करने की मांग की। टिकैत ने कहा कि यदि इस तरह की डील से घरेलू कृषि क्षेत्र को नुकसान होता है, तो किसानों को सुरक्षा और उचित क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए। किसान संगठनों की ओर से भी मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध तथा एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग उठती रही है।
टिकैत ने कहा कि लंबे समय से सर्किल रेट में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बुंदेलखंड सहित पूरे देश में सर्किल रेट बढ़ाने की मांग रखी, जिससे जमीन अधिग्रहण या बिक्री की स्थिति में किसानों और भूमिधरों को उचित मूल्य मिल सके।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी टिकैत ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो रहे हैं और चुनाव आयोग सरकार के इशारों पर काम कर रहा है।
टिकैत ने राहुल गांधी के कथित ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। यह टिकैत का राजनीतिक आरोप है, जिस पर चुनाव आयोग या सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
2027 चुनाव पर रुख
टिकैत ने कहा कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही किसी दल का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता अपने विवेक से फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने 2020-21 के किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान उठाई गई कई मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं।
टिकैत ने किसानों से संगठित रहने और अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की। इस मौके पर राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन,जिलाध्यक्ष,द्विजेंद्र निरंजन बलराम सिंह निरंजन सहित हजारों की संख्या में किसान मौजूद थे।



