गोरखपुर: ब्रह्मलीन महंतों के सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह में शामिल हुए CM योगी, किया पुस्तक का विमोचन

उप्र के गोरखपुर जनपद में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ सभागार में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की

गोरखपुर: ब्रह्मलीन महंतों के सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह में शामिल हुए CM योगी, किया पुस्तक का विमोचन
Published By- Diwaker Mishra

गोरखपुर से अजीत सिंह की रिपोर्ट

गोरखपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के गोरखपुर जनपद में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ सभागार में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित 'सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह' के अंतर्गत 'युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि' विषयक व्याख्यान में हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री ने अपने दादा गुरु ब्रह्मलीन दिग्विजयनाथ को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व प्राचार्य डॉ रामनरेश पाण्डेय द्वारा लिखित श्री हनुमत कथा पूजनम पुस्तक का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित करते हुए कहा कि रणनीति की परिणीति रामलला का प्रकटीकरण होने के साथ आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के बाद क्या भव्य स्वरूप है अयोध्या एक बार फिर से हर सनातन धर्म लंबी को गौरव की अनुभूति कराती है।

रामद्रोही कैसे इस बात को बर्दाश्त करेंगे की अयोध्या में भगवान राम का यह वैभव सनातन धर्म का यह वैभव इस रूप में जगमगाता हुआ दिखाई दे, तो वे दुष्प्रचार करेंगे।

वे भ्रम पैदा करेंगे। याद रखना जब बजरंगबली भी संजीवनी बूटी लेने के लिए गए थे तो उनके रास्ते में भ्रम पैदा करने के लिए कोई कालनिमि आया था हनुमान जी पहचान गए थे।

आप सभी राम भक्तों को भी वह शक्ति अपने अंदर अर्जित करनी चाहिए। सनातन धर्म के एकता के मार्ग में और सनातन गौरव के मार्ग में कोई भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए कोई संसय नहीं होना चाहिए।

हम सही दिशा में आगे चले हैं आगे बढ़े हैं और उसी गति की प्रणति है कि आज काशी में काशी विश्वनाथ धाम इतना भव्य रूप में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देखने को मिला है। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि, विंध्यवासिनी धाम में आप जाएंगे कितना भव्य धाम हो गया है।

प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होता है तो कुंभ का एहसास सनातन धर्म को पहली बार होता है कि इतना भव्य और दिव्य भी हो सकता है हमारा आयोजन जो आज वहां देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि आज से लगभग 94-95 वर्ष पहले जब देश गुलाम था जब साधन नहीं थे संसाधनों का अभाव था तो ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना किया। एक सामान्य मनुष्य में और एक संत में यही अंतर होता है।

सामान्य मनुष्य अपने लिए सोचता है अपने जीने के तरीके के बारे में चिंता करता है, अपने परिवार के बारे में सोचता है महापुरुषों की दृष्टि देखें 1932 में साधन कम थे संसाधन नहीं थे लेकिन उन्होंने शिक्षा के एक बीच का रोपण किया।