प्रतापगढ़ में PM किसान सम्मान निधि योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार

उप्र के प्रतापगढ़ जनपद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है। जनपद के कुंडा तहसील में तैनात संविदा वीआरसी ऑपरेटर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रतापगढ़ में PM किसान सम्मान निधि योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
Published By- Diwaker Mishra

प्रतापगढ़ से विकास गुप्ता की रिपोर्ट  

प्रतापगढ़/जनमत न्यूज़। उप्र के प्रतापगढ़ जनपद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है। जनपद के कुंडा तहसील में तैनात संविदा वीआरसी ऑपरेटर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, सरकारी पोर्टल की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर बिना वैध भूमि रिकॉर्ड के अपात्र लोगों का पंजीकरण किया जाता था।

इस मामले में 3 लाख 18 हजार से अधिक अपात्र पंजीकरण का मामला सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, वास्तविक वित्तीय नुकसान की कुल राशि का आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट होना बाकी है।

एएसपी पूर्वी आलोक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शिवकुमार यादव, अनुराग गुप्ता और जितेंद्र कुमार शामिल हैं। शिवकुमार यादव पर सीएससी संचालक के रूप में अपात्र लोगों की पोर्टल पर एंट्री करने और कथित अवैध वसूली का आरोप है।

वहीं, अनुराग गुप्ता कुंडा तहसील में संविदा वीआरसी ऑपरेटर के पद पर तैनात था। उस पर सरकारी लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग तथा गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप लगाया गया है। तीसरे आरोपी जितेंद्र कुमार पर गिरोह के सहयोगी के रूप में कथित अवैध लेन-देन में भूमिका निभाने का आरोप है।

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह कथित तौर पर बिना वैध भूमि रिकॉर्ड के अपात्र लोगों का पंजीकरण कर सरकारी योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया में शामिल था। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, सात सक्रिय सिम कार्ड और एक बायोमेट्रिक फिंगर स्कैनर बरामद किया है। बरामद मोबाइल में आईफोन 16 प्रो, सैमसंग एस25, दो वीवो वी29 प्रो और एक रियलमी 8 शामिल हैं।

पुलिस को यूपीआई लेन-देन के स्क्रीनशॉट, व्हाट्सऐप ग्रुप और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। फिलहाल पुलिस गिरोह के नेटवर्क, फर्जी पंजीकरण कराने वाले लोगों और योजना की धनराशि के कथित दुरुपयोग की जांच कर रही है।