रायबरेली के जेल रोड पर 12 फीट धंसी नई सड़क, सीवर लीकेज बना कारण; गुणवत्ता पर उठे सवाल
उप्र के रायबरेली शहर के जेल रोड पर करोड़ों रुपये की लागत से हाल ही में निर्मित सड़क महज एक माह के भीतर बीचों-बीच धंस जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रायबरेली से महताब खान की रिपोर्ट
रायबरेली/जनमत न्यूज़। उप्र के रायबरेली शहर के जेल रोड पर करोड़ों रुपये की लागत से हाल ही में निर्मित सड़क महज एक माह के भीतर बीचों-बीच धंस जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सड़क के बीच लगभग 12 फीट का गहरा गड्ढा बनने से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और उन्होंने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार तथा घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क अचानक धंस गई, जिससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी।
प्रारंभिक जांच में सड़क धंसने की वजह सीवर पाइपलाइन में लीकेज बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन से लगातार पानी का रिसाव होने के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर हो गई, जिससे सड़क बैठ गई।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप और गुणवत्ता के साथ किया गया होता तो केवल सीवर लीकेज से इतनी नई सड़क इस तरह नहीं धंसती।
उनका आरोप है कि निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों, ठेकेदार और संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
घटना के बाद प्रशासन ने क्षतिग्रस्त हिस्से को बैरिकेडिंग कर यातायात नियंत्रित कर दिया है। मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और राहगीर मौजूद रहे। विभाग की ओर से सड़क की मरम्मत और सीवर पाइपलाइन की खामियों को दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है, जबकि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क एक महीने भी नहीं टिक पाई, तो निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है? जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल तकनीकी खामी थी या फिर निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला।


