संभल: डीपीआरओ पर प्रधानों और सचिवों से अवैध वसूली का आरोप, डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच

उप्र के संभल के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) जितेंद्र पाल सिंह पर प्रधानों और सचिवों से अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

संभल: डीपीआरओ पर प्रधानों और सचिवों से अवैध वसूली का आरोप, डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच
Published By- Diwaker Mishra

संभल से रामव्रेश यादव की रिपोर्ट

संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) जितेंद्र पाल सिंह पर प्रधानों और सचिवों से अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले से जुड़े छह कथित लेन-देन के वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) गोरखनाथ भट्ट को सौंप दी है। पूरा मामला बहजोई स्थित जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बने जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से जुड़ा है। आरोप है कि डीपीआरओ विभिन्न कार्यों के बदले प्रधानों और सचिवों से धनराशि की मांग कर रहे थे।

वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक प्रधान से 15 हजार रुपये के बजाय 20 हजार रुपये लेने की बात सुनाई दे रही है। वहीं, एक अन्य वीडियो में 44 हजार रुपये के लेन-देन का जिक्र किया गया है।

बताया जा रहा है कि एक वीडियो डीपीआरओ कार्यालय का है, जिसमें उनके बगल में बैठा एक कर्मचारी रुपये लेते हुए दिखाई दे रहा है। अन्य वीडियो कथित रूप से एक वाहन के अंदर रिकॉर्ड किए गए हैं। वीडियो में 500-500 रुपये के नोट भी नजर आ रहे हैं।

जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वायरल वीडियो के एक हिस्से में कथित तौर पर डीपीआरओ यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि जब वे सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी (एडीपीआरओ) थे, तब 15 हजार रुपये लेते थे, लेकिन डीपीआरओ बनने के बाद उन्हें 20 हजार रुपये चाहिए।गौरतलब है कि जितेंद्र पाल सिंह से पहले तैनात डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय भी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे थे।

विभागीय कार्यों में लापरवाही और उच्च अधिकारियों को भ्रामक सूचना देने के आरोप में 22 अगस्त 2025 को शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद जितेंद्र पाल सिंह को कार्यवाहक डीपीआरओ का प्रभार सौंपा गया था और बाद में उनकी पदोन्नति कर उन्हें डीपीआरओ बनाया गया।

मामले से जुड़ा एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि डीपीआरओ ने मुरादाबाद के आवास विकास क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की अचल संपत्ति खरीदी है तथा उनके पास एक लग्जरी कार भी है। पत्र में उनकी आय के स्रोतों पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सीडीओ गोरखनाथ भट्ट ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति उपलब्ध साक्ष्यों और वायरल वीडियो की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।