अटल पेंशन योजना में बड़ा बदलाव कर सकती है सरकार, ₹10,000 हो सकती है पेंशन; इनको होगा बड़ा फायदा
भारत सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
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नई दिल्ली/जनमत न्यूज़। भारत सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
बढ़ती महंगाई और रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्च को ध्यान में रखते हुए सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की अधिकतम सीमा बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में अधिकारियों के हवाले से जानकारी सामने आई है।
देश में असंगठित क्षेत्र के कामगार कुल कार्यबल का लगभग 90% हिस्सा हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, घरेलू कामगार, दिहाड़ी मजदूर और छोटे स्तर पर स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इन श्रमिकों को न तो स्थायी नौकरी मिलती है और न ही पेंशन, पीएफ या अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
सरकार ने मई 2015 में अटल पेंशन योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य इन वर्गों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है। वर्तमान में इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है। हालांकि, बढ़ती महंगाई के चलते यह राशि अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
अब तक इस योजना से 9 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, लेकिन इनमें से करीब आधे सदस्य नियमित योगदान नहीं कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ नए सदस्यों के जुड़ने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन की सीमा बढ़ाने से योजना की लोकप्रियता और भागीदारी दोनों बढ़ेंगी।
वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) इस प्रस्ताव पर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि पेंशन की अधिकतम सीमा ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह की जा सकती है। इससे योजना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक उपयोगी बनाया जा सकेगा।
जो सदस्य 31 मार्च 2016 से पहले इस योजना से जुड़े थे, उन्हें शुरुआती पांच वर्षों तक सरकार की ओर से सह-योगदान (को-कंट्रीब्यूशन) दिया गया था। यह सदस्य के योगदान का 50% (अधिकतम ₹1,000 प्रति वर्ष) तक सीमित था। यह लाभ केवल उन लोगों को मिला, जो आयकरदाता नहीं थे और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा योजना का हिस्सा नहीं थे।
सरकार इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ‘पेंशन सखी’ और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) मॉडल का उपयोग करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, लोगों द्वारा नियमित योगदान सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 26 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने इस योजना को वित्त वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से सरकारी खजाने पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से निर्धारित योगदान (Defined Contribution) मॉडल पर आधारित है। ऐसे में इसका वित्तीय भार सीमित रहने की संभावना है।
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