भदोही: औद्योगिक गलियारे के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, परियोजना वापस लेने की मांग
उप्र के भदोही जनपद के अभोली ब्लॉक की मतेथू ग्रामसभा में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) का विरोध तेज हो गया है।
भदोही से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
भदोही/जनमत न्यूज़। उप्र के भदोही जनपद के अभोली ब्लॉक की मतेथू ग्रामसभा में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) का विरोध तेज हो गया है।
करीब 500 हेक्टेयर भूमि पर केंद्र सरकार की ओर से औद्योगिक गलियारा स्थापित किए जाने के प्रस्ताव और प्रारंभिक सर्वे की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए परियोजना को तत्काल वापस लेने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा मतेथू ग्रामसभा के कनकपुर, वीरभद्रपट्टी, हरिपट्टी, प्रतापसिंहपट्टी, दानुपुर समेत कई गांवों की कृषि और रिहायशी भूमि को प्रभावित करेगा।
उनका आरोप है कि यदि यह परियोजना लागू हुई तो हजारों लोगों के घर उजड़ जाएंगे और कई गांवों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर लोगों को बेघर करना उचित नहीं है।
वर्षों की मेहनत से बनाए गए मकान, खेत, बाग-बगीचे और सामाजिक परिवेश किसी भी मुआवजे से वापस नहीं मिल सकते। उनका कहना था कि गांवों को उजाड़कर उद्योग स्थापित करने से स्थानीय लोगों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि उनकी आजीविका और भविष्य पर संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि समाचार पत्रों में परियोजना से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश फैल गया।
उनका कहना है कि घनी आबादी वाले इलाके में औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों की स्थापना से पर्यावरण, खेती-किसानी और सामाजिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की कि प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे की योजना को तत्काल निरस्त किया जाए और किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित ग्रामीणों की सहमति ली जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो क्षेत्र के लोग व्यापक जन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने एकजुट होकर अपने गांवों और जमीन की रक्षा करने का संकल्प दोहराया।


