मस्जिदों-मजारों को बनाया जा रहा निशाना, भाजपा की हिंदू-मुस्लिम को बांटने की साजिश: सांसद जियाउर्रहमान वर्क
उप्र के संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान वर्क ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश और देश में मदरसों, ईदगाहों, मस्जिदों और मजारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
संभल से रामव्रेश यादव की रिपोर्ट
संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान वर्क ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश और देश में मदरसों, ईदगाहों, मस्जिदों और मजारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। हम इस स्थिति से बेहद दुखी और चिंतित हैं।
उन्होंने कहा हमारा मानना है कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव के समय हिंदू और मुस्लिम समाज को आपस में बांटने की राजनीति करती है, जबकि हमारा उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि सभी लोगों को एकजुट होकर भाईचारे और सौहार्द के साथ रहने के लिए प्रेरित करना है।
कल संभल के कसूरवा गांव में जो घटना हुई, उसी के संबंध में हमने यह प्रेस वार्ता आयोजित की है और आप सभी मीडिया साथियों को आमंत्रित किया है। मस्जिद पर प्रशासन द्वारा जो कार्रवाई की गई है, उसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।
मैं प्रशासनिक अधिकारियों से कहना चाहता हूं कि चाहे अधिकारी छोटा हो या बड़ा, यदि उसने कानून और संविधान के विरुद्ध कार्य किया है, तो एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं संसद से लेकर न्यायालय तक इस मुद्दे को उठाऊं। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
जिस मस्जिद को ध्वस्त किया गया है, उसके संबंध में उपलब्ध तथ्यों के अनुसार संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। यह मस्जिद लगभग 150 वर्ष पुरानी थी। इसके अतिरिक्त यह संपत्ति वक्फ बोर्ड में विधिवत पंजीकृत थी। इसके बावजूद एसडीएम, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने संबंधित पक्ष की बात सुनना भी उचित नहीं समझा।
धारा 67 के तहत जनवरी 2026 में नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 26 अप्रैल 2026 को एसडीएम कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया। मई माह में हमारे वकीलों द्वारा डीएम कोर्ट में अपील दायर की गई, लेकिन नए डीएम की अदालत में कई बार सुनवाई नहीं हुई और अंततः पहली ही तारीख में मस्जिद को तोड़ने का आदेश दे दिया गया।
हमारे वकील ने सुनवाई की तारीख बढ़ाने के लिए आवेदन दिया था, क्योंकि उस समय वे उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई। हैरानी की बात यह है कि रात लगभग 11:30 से 12 बजे के बीच आदेश लिखकर मामले को निरस्त कर दिया गया।
साथ ही 14 मई की बैक डेट में एक टीम गठित कर दी गई, जबकि गांव के लोगों को यह तक नहीं बताया गया कि मस्जिद को तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
मैंने स्वयं तहसीलदार और अन्य अधिकारियों से बात कर पूछा कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है, जबकि वहां आबादी रहती है और लोगों को सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार उनसे कैसे छीना जा सकता है?
यह संपत्ति वक्फ बोर्ड में पंजीकृत थी। वर्ष 1984 में भी इसका रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड और एसडीएम कोर्ट में दर्ज था। पुराना वक्फ अधिनियम हो या नया, दोनों में स्पष्ट प्रावधान है कि वक्फ संपत्ति से संबंधित मामलों का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा।
इसके बावजूद अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की है।12 दिसंबर 2024 को भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा भी ऐसे मामलों में सावधानी बरतने और उचित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया था।
इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की। मैं इस मामले को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों के संपर्क में हूं। जिन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग किया है, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
मैं संभल, उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लोगों से कहना चाहता हूं कि वे भाजपा की नीतियों के कारण धर्म के नाम पर आपस में न लड़ें,भाजपा समाज को बांटकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।
हमारी लड़ाई किसी सरकार, पुलिस या प्रशासन से लाठी-डंडे अथवा हथियारों के बल पर नहीं है। हमारी लड़ाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर लड़ी जाएगी।
मैं संभल के सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि यदि उनके धार्मिक स्थलों, मस्जिदों, मदरसों या अन्य अधिकारों पर कोई आंच आती है, तो वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं।
यदि कोई अधिकारी गलत कार्य करता है, तो उसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएं।न तो घबराने की आवश्यकता है और न ही कानून हाथ में लेने की। चाहे कोई अधिकारी गलत करे या कोई नेता, उसके विरुद्ध कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करें। न्याय मिलने में समय लग सकता है, लेकिन न्याय अवश्य मिलेगा।
मेरे पास इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और प्रमाण मौजूद हैं। मैं मीडिया के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार हूं। ये दस्तावेज स्पष्ट रूप से सिद्ध करते हैं कि उक्त मस्जिद सौ वर्ष से अधिक पुरानी थी और वक्फ बोर्ड में विधिवत दर्ज थी।

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