पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये मिलकर बना रहे इस्लामी नाटो, भारत भी चल रहा ये दांव
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए सैन्य समझौता हुआ है। इस समझौते का तहत एक देश पर बाहरी हमला दूसरे देशों पर हमला माना जाएगा।
नई दिल्ली/इस्लामाबाद/रियाद/अंकारा/जनमत न्यूज़। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए सैन्य समझौता हुआ है। इस समझौते का तहत एक देश पर बाहरी हमला दूसरे देशों पर हमला माना जाएगा।
तुर्किये भी लंबे समय से इस्लामी देशों का नेतृत्व करने की चाहत रखता है। ये तीनों देश मिलकर आने वाले समय में एक इस्लामी नाटो का निर्माण कर सकते हैं, जिसमें इन तीनों देशों के हित शामिल होंगे।
इस्लामी नाटो का निर्माण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का फोकस 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' बनाने की ओर है। वहीं अमेरिका से कम हो रहे भरोसे के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी नाटो बनाने के राह पर चल दिए हैं।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते से सऊदी अरब को एक परमाणु हथियार से संपन्न देश का साथ मिला वहीं पाकिस्तान को संसाधनों से समृद्ध सऊदी अरब से मदद की उम्मीद मिली।
भारत पाकिस्तान के संघर्ष में हो सकता है कि सऊदी अरब सीधे सैन्य हस्तक्षेप न करे लेकिन वह पाकिस्तान की आर्थिक मदद तो कर ही सकता है।
इस्लामी नाटो के खिलाफ भारत की तैयारी
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये गठबंधन एक तरफ है, तो यूएई और इजरायल के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और रणनीतिक संबंध दूसरी तरफ हैं। 19 जनवरी को, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत, यूएई और इजरायल के साथ एक नया भू-राजनीतिक गठबंधन बना रहा है ताकि पाकिस्तान और चीन के साथ उभरते तुर्किये-सऊदी अरब गठबंधन का मुकाबला किया जा सके।
ये नए गठबंधन अमेरिकी और यूरोपीय शक्ति के सिकुड़ने का सीधा नतीजा हैं। यह रणनीतिक दांव अरब खाड़ी से भूमध्य सागर की और बढ़ रहा है। वहां, ग्रीस, साइप्रस और इजरायल एक आक्रामक तुर्किये के खिलाफ रणनीतिक गठबंधन को मजबूत बना रहे हैं।

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