मुजफ्फरनगर में सरकारी रास्ते पर अवैध गेट का मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा, उप्र शासन से मांगी आख्या
उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद तहसील जानसठ क्षेत्र के ग्राम बेल्डा, थाना भोपा में सरकारी रास्ते पर लगाए गए कथित अवैध गेट का मामला अब उप्र शासन से होते हुए केंद्र सरकार के स्तर तक पहुंच गया है।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद के तहसील जानसठ क्षेत्र के ग्राम बेल्डा, थाना भोपा में सरकारी रास्ते पर लगाए गए कथित अवैध गेट का मामला अब उप्र शासन से होते हुए केंद्र सरकार के स्तर तक पहुंच गया है। मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के उप सचिव ए.के. मित्रा की ओर से उप्र सरकार को पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि इस पत्र के माध्यम से पूरे प्रकरण में जानसठ के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से आख्या मांगी गई है। मामले के केंद्र सरकार तक पहुंचने के बाद स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सरकारी रास्ते पर लगाए गए गेट को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि नयाब तहसीलदार बृजेश कुमार एवं लेखपाल व अन्य अधिकारियों ने अपनी जांच में सरकारी रास्ते पर लगे गेट को अवैध बताया और उसे 7 दिन के भीतर हटाए जाने की बात कहते हुए रिपोर्ट लगा दी गई थी लेकिन निर्धारित समय बीतने के बावजूद गेट हटाने की कार्रवाई नहीं होने से अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजस्व विभाग की जांच के बाद भी गेट नहीं हटा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बेल्डा में सरकारी रास्ते पर गेट लगाए जाने की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच की। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच में गेट को सरकारी रास्ते पर अवैध रूप से लगा हुआ पाया गया था और उसे सात दिन के भीतर हटाने की बात कही गई थी।
हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बावजूद गेट नहीं हटाए जाने का आरोप है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि राजस्व विभाग नायब तहसीलदार बृजेश कुमार एवं लेखपाल की जांच में गेट अवैध पाया गया था, तो संबंधित अधिकारियों ने अब तक उसे हटवाने के लिए क्या कार्रवाई की?
केंद्र सरकार के पत्र के बाद बढ़ी जवाबदेही
अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के उप सचिव की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखे जाने और एसडीएम जानसठ से आख्या मांगे जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। आख्या के माध्यम से प्रकरण की वास्तविक स्थिति, पूर्व में की गई जांच और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी सामने आ सकती है।
कार्रवाई होगी या कागजों तक सीमित रहेगा मामला?
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि सरकारी रास्ते से संबंधित शिकायत पर राजस्व विभाग की जांच के बाद क्या कदम उठाए गए? क्या संबंधित अधिकारियों ने गेट हटाने के लिए कोई आदेश जारी किया और यदि किया, तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ?
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता को अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है। देखना होगा कि एसडीएम जानसठ की आख्या के बाद उत्तर प्रदेश शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और सरकारी रास्ते को लेकर उत्पन्न विवाद का नियमानुसार समाधान कब तक हो पाता है



