करवा चौथ पर भद्रा एवं शुक्रास्त दोष नहीं: व्रत को लेकर भागवताचार्य पंडित गणेश चंद्र वशिष्ठ ने दी जानकारी
करवा चौथ व्रत को लेकर समाज में भद्रा एवं शुक्रास्त के संबंध में फैल रही भ्रांतियों को दूर करते हुए हाथरस जनपद के मेंडू निवासी भागवताचार्य डॉ. पंडित गणेश चंद्र वशिष्ठ ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी है।
हाथरस से होमेश मिश्रा की रिपोर्ट
हाथरस/जनमत न्यूज़। करवा चौथ व्रत को लेकर समाज में भद्रा एवं शुक्रास्त के संबंध में फैल रही भ्रांतियों को दूर करते हुए हाथरस जनपद के मेंडू निवासी भागवताचार्य डॉ. पंडित गणेश चंद्र वशिष्ठ ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी है।
उन्होंने बताया कि निर्णय सिंधु एवं धर्म सिंधु जैसे धार्मिक ग्रंथों में शुक्रास्त के दौरान उन धार्मिक अनुष्ठानों पर विचार किया गया है, जिनमें उद्यापन एवं पूर्णाहुति का विधान होता है। उनके अनुसार, करवा चौथ व्रत में न तो पूर्णाहुति होती है और न ही उद्यापन का ऐसा विधान है, इसलिए इस व्रत पर शुक्रास्त का दोष नहीं माना जाना चाहिए।
पंडित गणेश चंद्र वशिष्ठ ने बताया कि करवा चौथ पर महिलाएं भगवान गणेश एवं चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करती हैं। इस अवसर पर महिलाएं नए वस्त्र एवं आभूषण धारण कर सोलह शृंगार करती हैं और अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं।
उन्होंने भद्रा की समयावधि का उल्लेख करते हुए बताया कि 28 अक्टूबर को सुबह 5:31 बजे भद्रा प्रारंभ होगी और 29 अक्टूबर को सुबह 4:50 बजे समाप्त होगी।
उनके अनुसार इस समय को लेकर करवा चौथ व्रत के संबंध में किसी प्रकार का भ्रम नहीं पालना चाहिए। डॉ. पंडित गणेश चंद्र वशिष्ठ ने मातृशक्ति से अपील की कि वे करवा चौथ व्रत को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों से बचें और धार्मिक विषयों पर प्रमाणिक जानकारी के आधार पर ही निर्णय लें।



