मुजफ्फरनगर में संविदा कर्मियों के धरने का नहीं दिख रहा असर, धरना स्थल पर शेरो-शायरी का दौर

उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन तीन दिन बीतने के बावजूद धरने का स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।

मुजफ्फरनगर में संविदा कर्मियों के धरने का नहीं दिख रहा असर, धरना स्थल पर शेरो-शायरी का दौर
Published By- Diwaker Mishra

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन तीन दिन बीतने के बावजूद धरने का स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।

एक ओर संविदा कर्मचारी अपनी मांगों का बोर्ड लगाकर धरना दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरना स्थल पर महिलाओं और पुरुषों के बीच शेरो-शायरी का दौर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

धरने पर बोर्ड, लेकिन आंदोलन की गंभीरता पर सवाल

संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना शुरू किया है। कर्मचारियों का उद्देश्य अपनी समस्याओं को शासन और विभाग तक पहुंचाना है, लेकिन धरना स्थल पर मांगों को लेकर ठोस रणनीति के बजाय शेरो-शायरी होती दिखाई देने से आंदोलन के तरीके पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या केवल धरने पर बैठने और मांगों का बोर्ड लगाने से समस्याओं का समाधान हो जाएगा?

संविदा कर्मियों के बिना भी मरीजों की देखभाल का दावा

धरने के तीन दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं प्रभावित होती नजर नहीं आ रही हैं। विभाग में मरीजों को उपचार और देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में संविदा कर्मियों के धरने का विभागीय कामकाज पर कोई खास असर दिखाई नहीं देने की बात सामने आ रही है।

हालांकि, सभी स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य रूप से संचालित होने और मरीजों को पर्याप्त देखभाल मिलने की स्थिति की पुष्टि संबंधित विभागीय आंकड़ों से की जानी चाहिए।

अब सवाल-धरना या सिर्फ औपचारिकता?

संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन आंदोलन का असर न दिखाई देना और धरना स्थल पर शेरो-शायरी का दौर चर्चा का विषय बन गया है।

अब देखना होगा कि संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कोई ठोस रणनीति अपनाते हैं या धरना इसी तरह जारी रहता है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं, इस पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं।