यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन में घोटाला, GM सुगंधा शर्मा बर्खास्त; 15 लाख के टेंडर को 15 करोड़ का किया जारी

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में, जहां ‘भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस’ के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहां मेडिकल किट की खरीद को लेकर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है।

यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन में घोटाला, GM सुगंधा शर्मा बर्खास्त; 15 लाख के  टेंडर को 15 करोड़ का किया जारी
Published By- Diwaker Mishra

स्पेशल रिपोर्ट रजनीश छवि

लखनऊ/जनमत न्यूज़। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में, जहां ‘भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस’ के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहां मेडिकल किट की खरीद को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है।

जानकारी के अनुसार यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (UPMSCL) में वर्ष 2024 के एक टेंडर के तहत जरूरत से करीब 100 गुना अधिक खरीद आदेश जारी किया है। खरीद प्रक्रिया में एक की जगह 100 गुना ऑर्डर दिए जाने के आरोपों के बाद सप्लाई चेन की जनरल मैनेजर (GM) सुगंधा शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है।

इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग और खरीद व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। मामला मेडिकल किट की मांग, ऑर्डर की मात्रा और सप्लाई चेन के प्रबंधन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।

आरोप है कि टेंडर की शर्तों और खरीद आदेश में गड़बड़ी के कारण एक कंपनी को अनुचित फायदा मिला। इस मामले में अधिकारियों की भूमिका और खरीद प्रक्रिया की जांच भी की जा रही है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बजट से होने वाली खरीद से जुड़ा है। वर्ष 2024 में संबंधित कंपनी ने जांच किट और उपकरणों के लिए प्रति नग के हिसाब से दर दी थी, लेकिन अधिकारियों ने उसी दर पर प्रति पैकेट के हिसाब से खरीद आदेश जारी कर दिया।

इससे ऑर्डर की मात्रा वास्तविक जरूरत से बहुत अधिक हो गई। कंपनी ने जारी आदेश के अनुसार सप्लाई भी कर दी। आरोप है कि इस प्रक्रिया से कंपनी को फायदा पहुंचा और सरकारी खरीद में बड़ी अनियमितता हुई।

मामले की शिकायत उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जो स्वास्थ्य मंत्री भी हैं, से की गई थी। इसके बाद प्रमुख सचिव स्तर पर जांच शुरू हुई, जिसमें खरीद प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियों का खुलासा होने की बात सामने आई।

चार जिलों की खरीद की जांच कर रही ED

इस मामले (UPMSCL Scam) के बीच NHM और यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से जुड़ी खरीद की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रही है। जांच के दायरे में श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर के सरकारी अस्पताल हैं।

ED ने वर्ष 2013 से 2025-26 तक इन जिलों में दवाओं और उपकरणों की खरीद, सप्लाई, टेंडर और जारी बजट का रिकॉर्ड मांगा था। हालांकि, विभागीय स्तर पर पिछले सात वर्षों की खरीद से जुड़े सभी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात भी सामने आई है।

मामले में अब अदालत की कार्रवाई और जांच के आगे बढ़ने के साथ खरीद आदेश जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर है।

एक की जगह 100 गुना ऑर्डर से उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऑर्डर की मात्रा तय करते समय जरूरतों का सही आकलन किया गया था या नहीं?

यदि मांग से कई गुना अधिक ऑर्डर जारी किए गए, तो इसके पीछे की वजह क्या थी?

क्या यह तकनीकी या मानवीय गलती थी अथवा खरीद प्रक्रिया में निगरानी की कमी रही?

अतिरिक्त ऑर्डर के कारण सरकारी धन पर कितना प्रभाव पड़ा?

कितनी मेडिकल किट की आपूर्ति हुई और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन किया गया? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें

उत्तर प्रदेश में मेडिकल किट खरीद से जुड़ा यह मामला सरकारी खरीद प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित करता है।

एक की जगह 100 गुना ऑर्डर दिए जाने की बात सामने आने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और खरीद प्रक्रिया में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए क्या बदलाव किए जाते हैं?

फिलहाल, मामले से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों, विभागीय जांच के निष्कर्षों और शासन के विस्तृत पक्ष के सामने आने का इंतजार रहेगा। इन जानकारियों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऑर्डर में इतनी बड़ी विसंगति कैसे हुई और इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई है।