लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाने का अमित शाह का प्लान, संभाली कमान; क्या है BJP का मिशन केरल?

केंद्र सहित देश के कई राज्यों में सत्तासीन भाजपा की पहुंच से सबसे दूर रहने वाला दक्षिण भारत का केरल अब पार्टी की भावी रणनीति का बड़ा केंद्र बन गया है।

लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाने का अमित शाह का प्लान, संभाली कमान; क्या है BJP का मिशन केरल?
Published By- Diwaker Mishra

तिरुवनंतपुरम/जनमत न्यूज़। केंद्र सहित देश के कई राज्यों में सत्तासीन भाजपा की पहुंच से सबसे दूर रहने वाला दक्षिण भारत का केरल अब पार्टी की भावी रणनीति का बड़ा केंद्र बन गया है। इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी यहां बड़ी छलांग लगाने की कोशिश में है, जिसकी कमान खुद गृह मंत्री अमित शाह संभाले हुए हैं। भाजपा ने यहां पर ‘जो कभी नहीं बदला है, वह अब बदलेगा’ का नारा दिया है।

हाल में हुए स्थानीय निकायों के चुनाव में राजधानी तिरुवनंतपुरम की नगर निगम व दो नगर पालिकाओं में जीत के बाद भाजपा यहां पर काफी उत्साहित है। यही वजह है कि अमित शाह ने अपने हाल के केरल दौरे में कार्यकर्ताओं में जोश को भरा और नारा दिया कि जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा।

इसके लिए उन्होंने अन्य राज्यों के भी उदाहरण दिए और कहा कि एक समय भाजपा मणिपुर, त्रिपुरा में कहीं नहीं थी, अब वहां सरकारें बना चुकी है। 1984 में लोकसभा में दो सांसद थे, अब लगातार तीन बार से सत्ता में है।

चूंकि केरल में वामपंथी दलों के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल चरम पर है, ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं के जोश व जनता में विकास की उम्मीदें जगाकर अपने लिए बड़ा सपना देख रही है।

बढ़ा है एनडीए का वोट शेयर

भाजपा का यह आत्मविश्वास बेवजह नहीं है। केरल में NDA का वोट शेयर लगातार बढ़ा है। 2001 में भाजपा का वोट शेयर करीब तीन फीसदी था जो 2016 और 2021 के बीच बढ़कर 12-15 फीसदी हो गया है।

हालांकि वोटों में यह बढ़ोतरी विधानसभा सीटों में आनुपातिक रूप से परिवर्तित नहीं हुई है। लोकसभा चुनावों में भाजपा को 2014 में 12 फीसदी, 2019 में 16 फीसदी व 2014 में 20 फीसदी वोट के साथ एक सीट भी मिली।

राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पिछले दो स्थानीय निकाय चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभर कर सामने आई। इस बार उसने 101 वार्डों में से 50 वार्ड जीतकर इतिहास रच दिया और पहली बार केरल में भाजपा का मेयर बना।

सभी छह नगर निगमों में भाजपा के NDA गठबंधन ने 23 फीसदी से अधिक का वोट शेयर हासिल किया, जिससे यह विश्‍वास मजबूत हुआ है कि शहरी मतदाता उसके दावों को गंभीरता से ले रहा है। 79 ग्राम पंचायतों में भाजपा दूसरे स्थान पर रही और दर्शाता है कि भाजपा गांवों में भी बढ़ रही है।

बड़े मुद्दे

भाजपा यहां पर विकास के सपने के साथ सामाजिक व भावनात्मक मुद्दों पर काम कर रही है। सबरीमाला मुद्दे को पार्टी के लिए धीमी गति से विकसित होने वाला एक मुद्दा है। इसने हिंदू मतदाताओं के कुछ वर्गों के साथ पार्टी का स्थायी संबंध बनाने में मदद की है, खासतौर पर दक्षिणी केरल में।

इसके साथ इझवा ओबीसी समुदाय के कुछ वर्गों के मतदान में बदलाव आया है, जिसे पारंपरिक रूप से वामपंथी झुकाव वाला समुदाय माना जाता है। यह ओबीसी समुदाय हिंदू समुदाय का 26 प्रतिशत है। पार्टी के बड़े नेता के सुरेंद्रन, वी मुरलीधरन और शोभा सुरेंद्रन भी ओबीसी समुदाय से आते हैं।