एटा: 21 साल बाद मिला न्याय, पुलिस हिरासत में युवक की मौत के दोषी दो पुलिसकर्मियों को उम्रकैद
उप्र के एटा जनपद के जैथरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2005 में पुलिस हिरासत में हुई 40 वर्षीय मोहरपाल उर्फ पप्पू की मौत के मामले में 21 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है।
एटा से नंद कुमार की रिपोर्ट
एटा/जनमत न्यूज़। उप्र के एटा जनपद के जैथरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2005 में पुलिस हिरासत में हुई 40 वर्षीय मोहरपाल उर्फ पप्पू की मौत के मामले में 21 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है।
सत्र न्यायाधीश राकेश धर दुबे की अदालत ने तत्कालीन पुलिसकर्मी महावीर सिंह और दरोगा गजराज सिंह को हत्या, अवैध हिरासत, मारपीट और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसला आने के बाद दोनों की जमानत निरस्त कर उन्हें न्यायिक हिरासत में एटा जिला जेल भेज दिया गया।
मामला जैथरा थाना क्षेत्र के गांव बहगों का है। वर्ष 2005 में प्रधानी के चुनाव के बाद गांव में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। दोनों पक्षों की ओर से थाने में शिकायतें दी गई थीं।
आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष कुमार, सिपाही महावीर सिंह, सौदान, ड्राइवर मिढ़ई लाल और दरोगा गजराज सिंह मोहरपाल उर्फ पप्पू को थाने लेकर आए थे।
परिजनों का आरोप था कि थाने में मोहरपाल के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। जब परिवार के लोग उसकी जानकारी लेने थाने पहुंचे तो उन्हें वहां से भगा दिया गया। आरोप है कि पुलिस हिरासत में ही मारपीट के दौरान मोहरपाल की मौत हो गई।
इसके बाद शव को पुलिस वाहन में डालकर काली नदी में फेंक दिया गया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और थाने पर हंगामा हुआ। कुछ समय बाद मोहरपाल का शव बरामद हुआ।
मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, मारपीट और साक्ष्य मिटाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में सीबीसीआईडी ने मामले की जांच की और जांच पूरी करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
लंबे समय तक मामले की सुनवाई चलती रही। इसी दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष कुमार और ड्राइवर मिढ़ई लाल की मृत्यु हो गई। अदालत में दो आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रेशपाल सिंह राठौर ने मामले में प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने महावीर सिंह और गजराज सिंह को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
बेटे ने कहा- खेती बेचकर लड़ी न्याय की लड़ाई
फैसले के बाद मृतक के बेटे सुनील ने कहा कि घटना के समय चुनाव चल रहे थे। 26 तारीख को पुलिस उनके पिता को पकड़कर ले गई थी। अगले दिन उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। 28 तारीख को परिवार को पता चला कि शव गायब कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि परिवार को थाने से भी भगा दिया गया था। सुनील ने कहा कि 21 साल बाद न्याय मिला है, इससे परिवार को राहत मिली है। न्याय की लड़ाई में खेती तक बेचनी पड़ी। मृतक की पत्नी गुड्डी देवी ने बताया कि घटना के समय उनके बच्चे छोटे थे।
पति की मौत के बाद परिवार ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्हें वर्षों से न्याय मिलने की उम्मीद थी। अदालत के फैसले के बाद परिवार को संतोष है कि आखिरकार दोषियों को सजा मिली।




