मुजफ्फरनगर में पांच अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, फिर भी मरीजों का इलाज जारी होने का आरोप

उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में अस्पतालों के संचालन, मानचित्र स्वीकृति और स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुपालन को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

मुजफ्फरनगर में पांच अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, फिर भी मरीजों का इलाज जारी होने का आरोप
Published By- Diwaker Mishra

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट 

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में अस्पतालों के संचालन, मानचित्र स्वीकृति और स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुपालन को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जारी आधिकारिक पत्र में पांच अस्पतालों के चिकित्सा व्यवस्था संबंधी पंजीकरण आगामी आदेशों तक निलंबित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके बावजूद संबंधित अस्पतालों में मरीजों का उपचार जारी रहने के आरोप सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक पत्र में इंडियन हॉस्पिटल, चरक हॉस्पिटल, अमृत हॉस्पिटल, अपोलो हॉस्पिटल एवं जे.यूं हॉस्पिटल के नाम शामिल हैं। पत्र में उल्लेख है कि समाचार पत्रों में प्रकाशित सूचनाओं के आधार पर मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (MDA) की टीम द्वारा संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए चिकित्सा व्यवस्था संबंधी पंजीकरण आगामी आदेशों तक निलंबित किया जाता है।

देशराज चौहान ने एमडीए की कार्रवाई पर उठाए सवाल

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद-बजरंग दल के जिला अध्यक्ष देशराज चौहान ने अस्पतालों के मामले में स्वास्थ्य विभाग और एमडीए की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एमडीए द्वारा सभी संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध पूरी तरह प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

उनका कहना है कि यदि अस्पतालों के पास स्वीकृत मानचित्र नहीं हैं तो ऐसे अस्पतालों के निर्माण और संचालन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किन परिस्थितियों में कथित रूप से बिना स्वीकृत मानचित्र के अस्पताल संचालित हो रहे हैं और विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।

देशराज चौहान ने आरोप लगाया कि जिन अस्पतालों के पंजीकरण निलंबित किए जाने के आदेश जारी हुए हैं, उनमें भी मरीजों का उपचार जारी रहने की शिकायतें मिल रही हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि आदेशों का धरातल पर पालन सुनिश्चित कराया जाए और यदि कोई अस्पताल नियमानुसार अनुमति के बिना चिकित्सा सेवाएं संचालित कर रहा है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भी उठाई आवाज

देशराज चौहान ने कथित अवैध एवं संदिग्ध अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालन का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से ऐसे केंद्रों की जांच, पंजीकरण, मशीनों की वैधता और निर्धारित नियमों के अनुपालन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

देशराज चौहान ने चेतावनी दी है कि यदि कथित अवैध अस्पतालों और संदिग्ध अल्ट्रासाउंड सेंटरों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि एमडीए और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें।

अब स्वास्थ्य विभाग और एमडीए से सीधे सवाल

- पंजीकरण निलंबित होने के बाद संबंधित अस्पतालों में मरीजों का उपचार किस आधार पर जारी है, यदि जारी है?

- क्या एमडीए ने सभी संबंधित अस्पतालों के स्वीकृत मानचित्रों की जांच की है?

- क्या स्वास्थ्य विभाग ने निलंबन आदेश के अनुपालन का मौके पर सत्यापन कराया है?

- संदिग्ध अल्ट्रासाउंड सेंटरों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई है?

- यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों और अस्पताल संचालकों पर क्या कार्रवाई होगी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी आदेश में पांच अस्पतालों के पंजीकरण निलंबित करने की बात स्पष्ट रूप से दर्ज है, तो क्या विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि आदेश का वास्तविक धरातल पर पालन भी हो?

अब देखना होगा कि जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण इस मामले में क्या कदम उठाते हैं या फिर शिकायतों और आरोपों के बीच अस्पतालों की स्थिति जस की तस बनी रहती है।