कुशीनगर: सीमा पर अवैध बालू लदे ट्रकों की कतार, पुलिस के 'ग्रीन सिग्नल' के इंतजार में खड़े हैं डंपर

उप्र के कुशीनगर जनपद की बिहार सीमा पर बालू के अवैध परिवहन और 'सेटिंग-गेटिंग' का बड़ा खेल बदस्तूर जारी है।

कुशीनगर: सीमा पर अवैध बालू लदे ट्रकों की कतार, पुलिस के 'ग्रीन सिग्नल' के इंतजार में खड़े हैं डंपर
Published By- Diwaker Mishra

कुशीनगर से प्रदीप यादव की रिपोर्ट

कुशीनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के कुशीनगर जनपद की बिहार सीमा पर बालू के अवैध परिवहन और 'सेटिंग-गेटिंग' का बड़ा खेल बदस्तूर जारी है। तमकुहीराज थाना क्षेत्र के टड़वा चौराहा लिंक मार्ग से सटे गोपालपुर (बिहार) सीमा क्षेत्र में देर रात बालू लदे ओवरलोड ट्रकों और डंपरों की लंबी कतारें खड़ी देखी जा सकती हैं।

यह गाड़ियां बिना वैध आईएसटीपी (ISTP - Inter-State Transit Pass) या फिर केवल 4 से 7 घन मीटर के फर्जी/अल्प प्रपत्रों की आड़ में पूरे डंपर को पार कराने के लिए यूपी सीमा से चंद कदम की दूरी पर 'उचित अवसर' की ताक में खड़ी रहती हैं।

​वैध कागजात हैं तो बॉर्डर पर किसका इंतजार?

अगर इन सभी ट्रकों के पास वैध खनन प्रपत्र और पूरे घन मीटर का आईएसटीपी मौजूद होता, तो ये सीधे नेशनल हाईवे या नियमित मार्ग से अपने गंतव्य की ओर रवाना होते।

यूपी सीमा में प्रवेश करने से पहले बिहार सीमा (गोपालपुर/नरहवा कोट मार्ग) पर रात के अंधेरे में इन भारी वाहनों का घंटों कतार में खड़े रहना खुद इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि खेल 'कागजात' का नहीं बल्कि 'सुविधा शुल्क' और 'हरी झंडी' का है।

​लिंक मार्ग और टड़वा चौराहे से एंट्री का सिंडिकेट

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मुख्य हाईवे पर सघन जांच या नजरों से बचने के लिए टड़वा चौराहा लिंक मार्ग को 'सेफ पैसेज' बनाया गया है।

कथित रूप से पुलिस और बिचौलियों के नेटवर्क से 'लाइन क्लियर' होने का इशारा मिलते ही इन गाड़ियों को यूपी सीमा में प्रवेश करा दिया जाता है। नाममात्र के आईएसटीपी पर 10 गुनी बालू पार कराने से प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।

​उठ रहे हैं तीखे सवाल:

​बिहार सीमा पर रात होते ही बालू लदे ट्रकों की लंबी कतारें किसके इशारे पर यूपी में घुसने का इंतजार करती हैं?

​टड़वा चौराहा और सीमावर्ती लिंक मार्गों पर ओवरलोड व फर्जी प्रपत्र वाले वाहनों की धरपकड़ के लिए तमकुहीराज पुलिस द्वारा नियमित चेकिंग अभियान क्यों नहीं चलाया जाता?

​राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले इस सिंडिकेट और खाकी की कथित मिलीभगत पर खनन विभाग और आला पुलिस अधिकारी कब संज्ञान लेंगे?

​शासन के जीरो टॉलरेंस के दावों के बीच सीमा पर खुलेआम हो रहा यह खेल उच्चस्तरीय जांच और सीमावर्ती थानों की भूमिका की गहन समीक्षा की मांग कर रहा है।