रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी मामले में दो अहम आदेश, कमिश्नर कोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक; HC का हस्तक्षेप से इनकार
यूपी के रामपुर जनपद स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले में सोमवार को दो अलग-अलग अदालतों से महत्वपूर्ण फ़ैसले सामने आए।
रामपुर से अभिषेक शर्मा की रिपोर्ट
रामपुर/जनमत न्यूज़। यूपी के रामपुर जनपद स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले में सोमवार को दो अलग-अलग अदालतों से महत्वपूर्ण फ़ैसले सामने आए।
एक ओर मुरादाबाद मंडलायुक्त (डिविजनल कमिश्नर) की अदालत ने यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी, वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की ओर से एक बाहरी व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उसे निस्तारित कर दिया।
कमिश्नर कोर्ट से बड़ी राहत, फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर
मुरादाबाद डिविजनल कमिश्नर अंजनेय कुमार सिंह की अदालत ने जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए यूनिवर्सिटी परिसर के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
डिविजनल कमिश्नर ने अपने आदेश में यूनिवर्सिटी की ओर से ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी। अपील के साथ अंतरिम राहत की मांग भी की गई, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अंतिम निर्णय होने तक किसी भी भवन को न तोड़े जाने का आदेश दिया।
जानकारी के लिए मुताबिक मंगलवार 28 जुलाई को इस मामले की सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन मुरादाबाद में एक अधिवक्ता के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा के कारण सुनवाई नहीं हो सकेगी। अगली सुनवाई की तिथि बाद में तय की जाएगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश क्या है
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने सुनवाई की। यह याचिका मोहम्मद यूसुफ नामक व्यक्ति ने दायर की थी, जिन्होंने स्वयं को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का पैरोकार बताया था।
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने आपत्ति उठाई कि किसी विश्वविद्यालय या ट्रस्ट की ओर से केवल उसका अधिकृत अधिकारी, जैसे रजिस्ट्रार या ट्रस्ट का प्रबंधक, ही न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।
कोई बाहरी व्यक्ति संस्था का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को सही माना और कहा कि बाहरी व्यक्ति को ट्रस्ट की ओर से याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए आजम खान के करिबी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के पैरोकार मोहम्मद यूसुफ की तरफ से डायल अपील को खारिज कर कर निस्तारित कर दिया।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या ट्रस्ट के प्रबंधक सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नोटिस के खिलाफ आपत्तियां दाखिल करते हैं, जिनमें क्षेत्राधिकार (जूरिस्डिक्शन) का मुद्दा भी शामिल हो, तो संबंधित प्राधिकारी उन आपत्तियों पर नियमानुसार विचार करेगा।
दोनों आदेशों का मतलब
दोनों आदेश अलग-अलग विषयों से जुड़े हैं। मुरादाबाद कमिश्नर की अदालत ने फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगाकर विश्वविद्यालय को राहत दी है।
वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण की वैधता पर कोई फैसला नहीं दिया, बल्कि केवल यह कहा कि ट्रस्ट की ओर से कोई बाहरी व्यक्ति याचिका दायर नहीं कर सकता। साथ ही, ट्रस्ट या विश्वविद्यालय के अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर सक्षम प्राधिकारी को नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।


