संभल में 74 साल की महिला की अनोखी अंतिम यात्रा, पालतू हाथियों ने भी नहीं छोड़ा साथ

उप्र के संभल जनपद में 74 साल की एक महिला की अनोखी अंतिम यात्रा निकाली गई। महिला के अंतिम समय में भी उनके दो पालतू हाथियों ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

संभल में 74 साल की महिला की अनोखी अंतिम यात्रा, पालतू हाथियों ने भी नहीं छोड़ा साथ
Published By- Diwaker Mishra

संभल से राम व्रेश यादव की रिपोर्ट

संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल जनपद में 74 साल की एक महिला की अनोखी अंतिम यात्रा निकाली गई। महिला के अंतिम समय में भी उनके दो पालतू हाथियों ने उनका साथ नहीं छोड़ा। मालकिन की अर्थी के पीछे गाजियाबाद के साथ परम और मोहन नाम के दोनों हाथी भी चल पड़े।

पूरा मामला उत्तर प्रदेश के जनपद संभल के गुन्नौर तहसील क्षेत्र के रजपुरा थाना क्षेत्र के बुरा गांव का है। यहां रहने वाली राम बेटी देवी, उम्र 74 वर्ष, की बुधवार को मौत हो गई थी। उन्हें पिछले 8 साल से शुगर की बीमारी थी।

तीन दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राम बेटी देवी की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, परिवार में मातम छा गया। पड़ोस और आसपास के गांवों के लोगों की घर के बाहर भीड़ लगनी शुरू हो गई।

दोनों बेटों मनवीर और चरण सिंह ने अपनी मां को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला लिया। बुरा गांव से राजघाट गंगा तक करीब 15 किलोमीटर लंबी शव यात्रा निकाली गई। इसमें आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोग शामिल हुए। शव यात्रा में सबसे आगे परिवार के पालतू हाथी परम और मोहन चले।

इसके पीछे 100 से ज्यादा लोग शव यात्रा में शामिल रहे। बबराला कस्बे से जब शव यात्रा निकली तो हाथियों के साथ अंतिम यात्रा देखकर कस्बे के लोग भी अचंभे में पड़ गए। परिवार के लोगों के मुताबिक, उनके परिवार में 200 साल से ज्यादा समय से हाथी पाले जा रहे हैं।

आसपास के क्षेत्र में परिवार की पहचान हाथी पालने वाले परिवार के रूप में है। साल 2012 में उनके पिता की मौत के बाद राम बेटी देवी ने हाथियों की देखभाल की थी। अब हाथियों की जिम्मेदारी परिवार के पास है। महिला की अंतिम यात्रा में 12 गांवों से करीब डेढ़ हजार लोग शामिल होने पहुंचे।

इसी दौरान श्रीकृष्ण और शिवाजी की झांकी भी निकाली गई। महिला की अंतिम यात्रा रजपुरा के बबराला कस्बे से होते हुए राजघाट तक पहुंची। परिवार लोगो कि उनके दादा करण सिंह के समय से ही परिवार में हाथी पाले जाते हैं।

फिलहाल परिवार के पास परम और मोहन नाम के दो हाथी हैं। दोनों की उम्र करीब 78 साल है। परिवार हाथी वाले नाथू सिंह के नाम से शहर में मशहूर है। नाथू हमारे स्वर्गीय पिताजी का नाम है.

मृतक राम बेटी देवी के बेटे ने बताया कि मां के जाने के बाद से हाथी परम और मोहन दोनों उदास हैं। उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ रखा है। दरअसल, राम बेटी देवी लंबे समय तक दोनों हाथियों की देखभाल करती थीं और उनका उनसे गहरा लगाव था।