अयोध्या: सावन की फुहार के साथ राम नगरी में झूलनोत्सव की शुरुआत, झूले पर विराजे रामलला

सावन माह की शुरुआत के साथ ही रामनगरी अयोध्या में भगवान के झूलनोत्सव की भक्तिमय परंपरा का शुभारंभ हो गया है। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल की गूंज, भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों के बीच श्रद्धालु झूलनोत्सव के आनंद में डूबने लगे हैं।

अयोध्या: सावन की फुहार के साथ राम नगरी में झूलनोत्सव की शुरुआत, झूले पर विराजे रामलला
Published By- Diwaker Mishra

अयोध्या से आज़म खान की रिपोर्ट  

अयोध्या/जनमत न्यूज़। सावन माह की शुरुआत के साथ ही रामनगरी अयोध्या में भगवान के झूलनोत्सव की भक्तिमय परंपरा का शुभारंभ हो गया है। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल की गूंज, भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों के बीच श्रद्धालु झूलनोत्सव के आनंद में डूबने लगे हैं।

इसी क्रम में अयोध्या के प्रसिद्ध रंग महल मंदिर में रविवार देर शाम भगवान श्रीराम, माता जानकी और तीनों भाइयों को भव्य झूले पर विराजमान कराया गया। भगवान के विग्रहों को फूलों से सजे आकर्षक झूले पर विराजमान कराए जाने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और भव्य आरती की गई।

इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के झूलनोत्सव के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की।सावन का महीना अयोध्या की धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है।

इस पूरे महीने रामनगरी के मठ-मंदिरों में भगवान के समक्ष प्रतिदिन शाम को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भजन, कीर्तन, पद गायन और अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालु भगवान की आराधना करेंगे।

वही महंतो व भाजपा की महिला मोर्चा महा मंत्री श्वेता सिंह ने बताया कि अयोध्या में करीब पांच हजार से अधिक मठ-मंदिर हैं, जहां सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया से झूलनोत्सव का व्यापक आयोजन शुरू होता है।

इससे पहले पवित्र मणि पर्वत पर भगवान के विग्रह को झूला झुलाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में झूलनोत्सव की धूम देखने को मिलती है। झूलनोत्सव के दौरान मंदिरों में भगवान के लिए आकर्षक झूले सजाए जाते हैं।

फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजे झूलों पर भगवान के विग्रह को विराजमान कर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूला झुलाते हैं। शाम होते ही मंदिरों में विशेष आरती और भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो जाता है।

अयोध्या में झूलनोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सदियों पुरानी रामनगरी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सावन के पूरे महीने अयोध्या के मंदिरों में इसी तरह भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहेगा।